करंजाकला। प्रख्यात कथा वाचक शांतनु महाराज ने कहा कि बिना भगवत कृपा के कोई भी व्यक्ति राम कथा नहीं सुन सकता। विज्ञान का युग है और इस युग में जब तक किसी चीज का वैज्ञानिक आधार नहीं होता है कोई विश्वास नहीं करता। आज शरीर के मैल को धोने का बहुत साधन है, लेकिन मन के मैल को धोने का वैज्ञानिकों ने कोई साधन नहीं खोजा। मन के मैल को धोने का एक मात्र साधन हरि कथा श्रवण है। वह बुधवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में सात दिवसीय श्री राम कथा अमृतवर्षा के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। राम कथा सुनने के लिए संगोष्ठी भवन में बैठने की जगह नहीं थी। स्थापना दिवस समारोह के तहत विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इससे पहले कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कथा वाचक शांतनु महाराज का माल्यार्पण कर स्वागत किया। संगीतमय रामकथा में हारमोनियम पर अमन मिश्र, तबला पर भीमसेन, वायलिन पर सुरेश, बासुरी पर सुनील, सहगायक अंकित पाठक और सर्वेश तिवारी रहे। आचार्य पूजन सौरभ शास्त्री ने किया। व्यास पीठ का पूजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम यादव, प्रो. बीबी तिवारी, वित्त अधिकारी एके सिंह , कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, अशोक सिंह, डा. राधेश्याम सिंह, डा. मनोज मिश्र, डा. राकेश यादव ने किया। कार्यक्रम का संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. वंदना राय, प्रो. बीडी शर्मा, डा. एसपी सिंह, डा. नुपूर तिवारी, डा. संदीप सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. रजनीश भास्कर, अमलदार यादव, डा. पीके कौशिक, अशोक सिंह समेत विद्यार्थी, शिक्षक और परिसर के शिक्षणेत्तर कर्मचारी मौजूद रहे।