बरईपार। कथावाचक प्रकाश चंद्र पांडेय विद्यार्थी ने कहा कि हनुमान जी का चरित्र सभी के लिए अनुकरणीय है। उनके सुन्दर चरित्र का दर्शन सुन्दरकाण्ड से ही होता है। उन्होंने महराजगंज ब्लॉक के करशूल नाथ धाम कंधी में आयोजित पांच दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन भक्तों को हनुमान जी के महात्म को बताया। हरिशंकर शुक्ल और ग्रमीणों ने आरती उतारकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
उन्होंने कहा कि सुन्दरकाण्ड रामचरित मानस के समस्त कांडों में श्रेष्ठ है। भोग, भगवान, यश, जगत सहित जो भी इच्छा होती है। उन सभी इच्छाओं की पूर्ति सुन्दरकाण्ड से होती है। सुन्दरकाण्ड का पाठ घर में प्रतिदिन अवश्य करें। जिससे भगवान की शक्ति मिलती रहे। सुन्दरकाण्ड मन की, जीवन की, विचारों की और आचरण की भी सुन्दरता है। सुंदरकाण्ड की शुरुआत किष्किकिन्धा पर्वत से होती है। महाराज ने कहा ‘अंगद सहित करेहु पुरराजो, ...भगवान ने कहा कि पहले राजकाज करो फिर मेरा नाम लेते रहना। मन को एकाग्र करो। जिससे भगवान से अपने को जोड़े। राज मिला, घर मिला, स्त्री मिली, सब कुछ मिलने के बाद व्यक्ति भगवान को छोड़ देता है। सारा समय गलत कार्यों में बिता देता है। उन्होंने कथा में आई महिलाओं से कहा कि घर की कुछ बातें कल पर टालो। जब गुस्सा आए तो कल पर टाल दीजिए। इसका पालन करें, घर परिवार में समृद्धि बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि हनुमान जी सुग्रीव को दरबार में लाए। उसके बाद सभी वानर सागर की ओर चलने लगे। जानकी जी को लंका से लाने के लिए चल दिए। महाराज ने कहा, बुजुर्गों के पास बैठने से उनका अनुभव प्राप्त होता है। कथा को खूब गाइए। हर एक चौपाई में भगवान का रस है। चित्रकूट से आई नीलम गायत्री जी ने भगवान राम के चरित्र पर प्रकाश डाला और बाल विदुषी स्वाति शुक्ला ने राम जन्म का मार्मिक प्रसंग से लोगों को भक्ति से विभोर कर दिया। कथा के दौरान जितेंद्र शुक्ल, सालिकराम सिंह, श्याम जी, शंखधर सिंह, अरविंद सिंह आदि मौजूद रहे ।