जौनपुर। निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव चौधरी लौटन राम निषाद ने कहा कि भाजपा देश को बांटकर शासन करना चाहती है। जबसे सरकार सत्ता में आई है कभी ओबीसी, एससी एसटी के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है तो कभी उनको हक दिलाने की लालच देकर वोट की राजनीति कर रही है। पिछडे़ वर्ग को तोड़ने के लिए उनके भीतर नफरत पैदाकर कमजोर करने की साजिश की जा रही है। इसके लिए भाजपा द्वारा जगह-जगह पिछड़ा वर्ग सम्मेलन कराया जा रहा है। वह गुरुवा को शहर के काशी राम सामुदायिक भवन में समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित पिछड़ा सामाजिक न्याय सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि हिंदुत्व की बात करने वाली भाजपा सरकार द्वारा अलग-अलग जातियों के लिए सम्मेलन कराया जाना चिंता का विषय है। आउट सोर्सिंग व निजीकरण के जरिए आरक्षित वर्ग के अधिकारों को छीना जा रहा है। विधान परिषद सदस्य रामजतन राजभर ने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार ठीक वैसा ही कर रही है जैसे फल पैदा करने और खिलाने की बात तो की जाती है लेकिन यहां तो पेड़ ही काटा जा रहा है। ओबीसी आरक्षण को क्रीमीलेयर की बाध्यता से मुक्त कर संविधान की नौवीं अनुसूची में दर्ज कराएं। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष राज नारायण बिंद ने कहा कि अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग को जनसंख्यानुपाती आरक्षण की व्यवस्था है लेकिन करीब 60 फीसदी ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था अनुचित है। पूर्व विधायक राजनारायण बिंद ने कहा कि संविधान में सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़ों को ओबीसी के नाम पर आरक्षण की व्यवस्था प्रतिकूल है। उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग की। दयाराम प्रजापति ने कहा कि एससी एसटी के साथ ओबीसी को भी पदोन्नति में आरक्षण देने, एससी एसटी की तरह ओबीसी के कार्य पालिका के साथ विधायिका में जनसंख्या के अनुरूप आरक्षण देने के साथ 2011 के अनुसार जनगणना को सार्वजनिक करने की मांग की। सरकार का कहना है कि 2021 में ओबीसी की जनगणना कराकर 2024 में प्रकाशित किया जाएगा। यह झूठा दिलासा है। सरकार की मंशा साफ है तो 2011 के अनुसार ही ओबीसी की जनगणना प्रकाशित कराए।