जौनपुर। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण 104 बेड की क्षमता वाले जिला महिला चिकित्सालय में बिस्तर खाली ही नहीं हैं। अस्पताल में 110 मरीज भर्ती किए गए हैं। इतने मरीजों की देखभाल के लिए जिला महिला चिकित्सालय में सिर्फ दो महिला चिकित्सक और सात पुरुष चिकित्सक तैनात हैं जबकि इनकी संख्या 12 होनी चाहिए।
जिला महिला चिकित्सालय की स्थिति बदतर हो गई थी। अस्पताल में इलाज की बेहतर व्यवस्था नहीं होने के कारण दलाल मरीजों को निजी चिकित्सालय में ले जाकर भर्ती करा देते थे। प्राइवेट अस्पतालों में प्रसव के लिए पांच से बीस हजार रुपये तक चुकाना पड़ता है। अस्पताल में अब स्थिति सुधरी है, जिससे दलालों की दाल नहीं गल रही है। इस वजह से मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। महिला अस्पताल में जनरल के 100 एवं प्राइवेट के दस बेड स्वीकृत है लेकिन प्राइवेट वार्ड के छह बेड नहीं है। इस समय मरीजों की संख्या 110 तक पहुंच गई है। रोज बेड के अभाव में चार से पांच मरीजों को लौटना पड़ रहा है। गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रामजी पांडेय ने सीएमएस के साथ बैठक कर बेड का वैकल्पिक इंतजाम करने को कहा था। सीएमएस महिला डा. आरएस सरोज ने सुरक्षा का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में बारह चिकित्सक होने चाहिए लेकिन नौ ही चिकित्सक है, जिसमें महिलाएं सिर्फ दो है।
जौनपुर। प्रसव पीड़ित महिलाओं के लिए कई तरह की सुविधाएं मुहैया कराई गई है। इसमें पहला प्रसव होने पर 6000 रूपया मरीज को तीन किस्तों में मिल रहा है। इसके अलावा सभी प्रसव पर ग्रामीण अंचल में 1400 एवं शहरी क्षेत्र में 1000 हजार रुपये मिल रहा है। हाईरिस्क प्रसव में भी 200 रुपये अतिरिक्त देने की व्यवस्था है। इसके अलावा सभी दवाएं नि:शुल्क मुहैया कराई जा रही है। बच्चों के लिए भी कई तरह की योजनाएं संचालित है। जिसका लाभ मरीज लेने लगे है।
जौनपुर। अगस्त माह में नर्स की ड्रेस में आकर एक महिला रात में बच्चे को सुई लगवाने के नाम पर लेकर जाने लगी। दूसरे मरीजों ने कहा कि रात में कहां सुई लगेगा तो वह घबराई बोली वार्ड खुला रहता है। अभी गई सुई लगवाकर ले आई। महिला उसके पीछे - पीछे जाने लगी तो उसने मना किया तो महिला ने अपने बच्चे को उससे छिन लिया। इस घटना के बाद बच्चा चोरी का भय मरीजों का सता रहा है। अभी तक महिला कौन थीं पता नहीं चल सका है। सुरक्षा का कोई इंतजाम महिला अस्पताल में नहीं है। नर्स भी कम संख्या में है।
मरीजों की संख्या बढ़ी है। क्षमता के अनुसार मरीजों को भर्ती किया गया है। लेकिन बेड नहीं होने से दिक्कत हो रही है। ऐसा व्यवस्था बेहतर होने एवं शासकीय योजनाओं का लोगों तक लाभ मिलने की वजह से हुआ है। डाक्टरों की कमी एवं सुरक्षा का इंतजाम नहीं होने से दिक्कत जरूर है।-डा. आरएस सरोज, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला चिकित्सालय