मछलीशह। गांवों में मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए से एंटी लार्वा की दवा अस्पताल द्वारा वितरित किया गया था। एएनएम को प्रधानों के माध्यम से छिड़काव कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन गांवों में दवा प्रधानों के घर पर ही डम्प पड़ा है। गांवों में गई स्वास्थ्य टीम से लोगों ने शिकायत की तो इसका खुलासा हुआ। एंटी लार्वा दवा बरसात से पहले ही अस्पताल से छिड़काव के लिए गांवों में भेजा गया था। एएनएम को दवा छिड़कवाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि 2 लीटर एन्टी लार्वा की दवा बरसात से पूर्व प्रत्येक ग्राम प्रधान को दिया गया था। जिसे 15 लीटर पानी में 5 एमएल डालकर छिड़काव करना था। पूरे बरसात के मौसम के लिए यह योजना तैयार की गई थी। महीने में दो बार छिड़काव करना था। मगर एएनएम के माध्यम से गांव में पहुंची दवा ग्राम प्रधान के घर पर ही डम्प रह गयी। छिड़काव नहीं कराया गया। मामले में क्षेत्र के कई गांवों में बातचीत की गई तो लोगों द्वारा किसी भी दवा का छिड़काव नहीं करने की बात सामने आयी। इधर मच्छर जनित रोग की चपेट में लोगों के आने के बाद जब गांव में स्वास्थ्य टीम गई तो मामले का खुलासा अस्पताल लौटने पर किया गया।
धर्मापुर। गौरा गांव निवासी विशाल (15) पुत्र धर्मराज राजभर की डेंगू से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। बुधवार को डा. दिनेश चन्द्रा के नेतृत्व में टीम ने गौरा गांव में पहुंच कर 34 लोगों के ब्लड का सैंपल लिया। गांव में एंटी डेंगू लार्वा दवा का छ्डिकाव करवाया।
गौरा गांव निवासी विशाल कुछ दिनों से बुखार से पीड़ित चल रहा था। विशाल का उपचार कुछ दिनों से एक प्राइवेट चिकित्सक के यहां चल रहा था। डेंगू की आशंका व्यक्त करते हुए डाक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। वहां से दो दिनों पहले हालत बिगड़ने पर उसे बीएचयू रेफर कर दिया गया था। जहां उपचार के दौरान सोमवार को देर शाम उसकी मौत हो गई थी। धर्मापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. डीके गिरी ने बताया कि विशाल की मौत डेंगू से हुई है इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। एहतियात के तौर पर गांव से कुल 34 लोगों के ब्लड सैंपल लेकर स्लाइड बनाई गई है। गांव में एंटी लार्वा का छ्डिकाव भी करवाया गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर जिला अस्पताल से भी टीम आकर लोगों के सीरम को जांच के लिए ले जाएगी।