शहर चुनें

अपना शहर चुनें

Top Cities
States

उत्तर प्रदेश

दिल्ली

उत्तराखंड

हिमाचल प्रदेश

जम्मू और कश्मीर

पंजाब

हरियाणा

विज्ञापन

हरतालिका तीज पर महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

Varanasi Bureau Updated Thu, 13 Sep 2018 12:24 AM IST

विज्ञापन
जौनपुर। हरतालिका तीज पर बुधवार को सुहागिनों ने निराजल व्रत रखा। अखंड सौभाग्य के लिए देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती की पूजा की। व्रती महिलाओं ने शाम को मंदिर में पुष्प, धूपदीप व नैवेद्य आदि से देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती का पूजन की। दोपहर के बाद मंदिर परिसर में दर्शन पूजन के लिए महिलाओं की भीड़ जुटने लगी। घरों में शाम को तीज व्रत की कथा का श्रवण किया गया। मिट्टी की बनी शिव, पार्वती और गणपति की पूजा की गई।
हरितालिका तीज व्रत का सुहागिन का कठिन व्रत है। कुंवारी कन्याएं भी व्रत रखती हैं। अखंड सुहाग की कामना से निराजल रहकर दिन भर भगवान शिव और पार्वती की आराधना की जाती है। भोर में उठकर मीठी वस्तु खाकर पानी पीने के बाद व्रत की शुरुआत हुई। बादलों की आवाजाही से मौसम थोड़ा ठीक था लेकिन उमस के चलते त्योहार कठिन हो गया था। तीज की तैयारियां एक दिन पहले से ही शुरू हो गई थीं। बाजार से शृंगार के वस्तुओं की खरीद और मेहंदी आदि लगाने का सिलसिला देर रात और बुधवार को दिन में भी चलता रहा। व्रती महिलाओं ने तिल के पत्ते को सिर पर रखकर स्नान किया। नए वस्त्र धारण किए और सोलह शृंगार किया। मिट्टी के बने शिव और पार्वती की मूर्तियों की प्रतीष्ठा के बाद उनकी पूजा की गई। उसके शिवालयों में जाकर दर्शन-पूजन किया गया। माता गौरी को सुहाग की वस्तुएं अर्पित की गईं। सुबह से पूजा के लिए फल आदि की खरीदारी के लिए दुकानों पर भीड़ रही। मेंहदी लगवाने के लिए एक दिन पहले से दुकानों पर महिलाओं की भीड़ रही। त्योहार के कारण फलों के दाम भी बढ़ गए थे। बाजार में केला जहां 40 से लेकर 50 रुपये दर्जन तो सेब 90 से 120 रूपये किलो तक बिका।
शाम को घरों में कथा का श्रवण भी किया गया। कथा के अनुसार सर्वप्रथम इस व्रत को देवी पार्वती ने महादेव को वर के रूप में पाने के लिए किया था। उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया था। उनकी तपस्या में व्यवधान न हो इसलिए सखियां उन्हें हर ले गई थी। शिव ने दर्शन दिए। देवी पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में महादेव का पूजन किया था। सखियों द्वारा हरे जाने के कारण ही इस तीज को हरितालिका तीज कहा जाने लगा। इस व्रत को मनाने की परंपरा उसी दिन शुरू हुई। पति की दीर्घायु के लिए तथा कुवारी कन्याएं मनोवांक्षित वर की प्राप्ति के लिए हरितालिका (तीज) का व्रत करती है।

Spotlight

Most Read

Related Videos

विज्ञापन
Next
Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।