मछलीशहर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रधानमंत्री की कान्फ्रेसिंग के दौरान अधीक्षक द्वारा अपशब्द का प्रयोग करने से क्षुब्ध आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया। मीटिंग का बहिष्कार करने के बाद सीडीपीओ से घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई। हालांकि मामले को तूल पकड़ता देख अधीक्षक ने खेद व्यक्त करते हुए बात खत्म करने की पहल भी की। मंगलवार को सीएचसी के सभागार में गर्भवती महिलाओं की देखभाल, सही समय पर टीकाकरण के साथ इलाज में सावधानी बरतने की जानकारी देने के लिए आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मीटिंग बुलाई गई थी। इसी बीच पीएम का लाइव कांफ्रेंसिंग भाषण सुनने के लिए सबको सभागार में एकत्रित होने को कहा गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक हो जाने पर उन्हें जमीन पर बैठाया गया। इसी दौरान सीएचसी के अधीक्षक डॉ. रफीक फारुकी का आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जड़ावती देवी व अन्य से बैठने को लेकर विवाद हो गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अधीक्षक अस्पताल में बुलाकर किसी को बैठने की भी सुविधा नहीं दिए। उनके व्यवहार से आक्रोशित होकर आंगनबाड़ी सभागार के बाहर निकली। अस्पताल परिसर में ही अधीक्षक के खिलाफ लामबंद होकर नारेबाजी करने लगी। हंगामे की जानकारी होते ही अस्पताल पहुंचे सीडीपीओ दीपक चौबे ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अधीक्षक द्वारा माफी मांगने की जानकारी दी। उन्हें समझाते हुए उनका हस्ताक्षर लेकर उच्चाधिकारियों को विवाद की जानकारी देने की बात कही। इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का गुस्सा ठंडा हुआ। हंगामा करने के दौरान अनिता श्रीवास्तव, रीता देवी, आशा यादव, कांती देवी, इंदू देवी, देवी श्रीवास्तव, शारदा देवी आदि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद रहीं। अधीक्षक रफीक फारुकी ने बताया कि कांफ्रेसिंग कार्यक्रम में संख्या अधिक हो जाने पर बाहर जा रही कार्यकर्ताओं को मैंने लाईव कार्यक्रम पूरा देखकर जाने को कहा। उन्होंने मेरी बात को अन्यथा ले लिया और मेरे शब्द का मतलब गलत निकाल लिया गया। उनके विरोध करने पर मैंने अपनी बात को लेकर उनसे खेद जाहिर किया था। लेकिन वह नहीं मानी और हंगामा करने लगी।