जौनपुर। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के किशुनपुर निवासी कैंसर मरीज के प्रार्थना पत्र पर सीजेएम ने वाराणसी के एपेक्स हॉस्पिटल के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी व गबन की धाराओं में वाद दर्ज कर थाने से रिपो र्ट तलब किया है। हॉस्पिटल के अधिकारियों व कर्मचारियों पर कैंसर के मरीज को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मिले एक लाख रुपये हड़पने का आरोप है।
अच्छेलाल निवासी किशुनपुर, लाइन बाजार ने कोर्ट में अधिवक्ता उपेंद्र विक्रम सिंह के माध्यम से प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि वह कैंसर से पीड़ित है। अपना इलाज एपेक्स हॉस्पिटल, वाराणसी में करा रहा था। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उसने व परिजनों ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया। हॉस्पिटल के अधीक्षक, अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा इलाज के संबंध में 2,66,700 रुपए का इस्टीमेट बनाकर दिया गया था। रुपए स्वीकृत होने तक वादी कर्ज लेकर इलाज कराता रहा। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से वादी व दो अन्य मरीजों के हक में 2,75,000 रूपए बैंक ड्राफ्ट के जरिए अस्पताल प्रशासन को भेजा गया जिसमें एक लाख रुपए वादी के पक्ष में कैंसर के इलाज के लिए स्वीकृत हुआ था। अस्पताल प्रशासन ने साजिश कर वादी के पक्ष में स्वीकृत एक लाख रुपए धोखाधड़ी व गबन कर हड़प लिया। थोड़ा ठीक होने पर हास्पिटल रुपए के संबंध में पूछताछ करने गया तो हॉस्पिटल के अधिकारी व कर्मचारी बहानेबाजी करके टालने लगे। जब वादी ने पुलिस कार्यवाही करने को कहा तो 26 अगस्त 2018 को हॉस्पिटल के दो कर्मी उसके घर आकर उससे कुछ कागजात पर दस्तखत कराने लगे और कहे कि रुपए मिल जाएंगे। इनकार करने पर मारपीट पर उतारू हो गए। गालियां व जान से मारने धमकी देते हुए चले गए। मुख्यमंत्री व पुलिस के उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई तब वादी ने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
दहेज हत्यारोपी पति को 10 वर्ष का सश्रम कारावास
जौनपुर। शाहगंज थाना क्षेत्र के मजडीहा में विवाहिता की दहेज हत्या करने के आरोपी पति को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम महेंद्र सिंह ने 10 वर्ष कारावास व छ: हजार रुपए अर्थ दंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन कथानक के अनुसार आजमगढ़ निवासी अरविंद ने कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत प्रार्थना पत्र देकर कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया था कि 8 मई 2014 को उसकी भतीजी सीमा की शादी मजडीहा निवासी आशीष के साथ हुई थी। विवाह के बाद पति व ससुराल वाले बाइक व चेन की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करते थे। सीमा ने घटना के पूर्व बताया था कि ससुराल वाले दहेज को लेकर उसकी हत्या कर देंगे। 30 जुलाई 2014 को 1:30 बजे गांव के एक व्यक्ति ने फोन किया कि आपकी भतीजी की तबीयत खराब है। ससुराल पहुंचा तो सीमा मृत पड़ी थी। ससुराल वाले साक्ष्य छिपाने के लिए उसे जलाने की तैयारी कर रहे थे। शरीर खुलवाकर देखा तो शरीर नीला पड़ गया था। ससुराल वाले उसकी हत्या कर दिए थे। सूचना देने शाहगंज थाने पर गया तो इसी बीच ससुरालवाले सीमा के शव को जमीन में गाड़ दिए। शाहगंज पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की। डीएम को प्रार्थना पत्र देने के बाद उनके आदेश पर 18 सितंबर 2014 को सीमा का शव जमीन से निकलवा कर पोस्टमार्टम व पंचनामा कराया गया। पुलिस ने विवेचना कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल किया। मृतका के परिजन कोर्ट में दहेज हत्या की बात से मुकर गए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने एवं तमाम तथ्य एवं परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए यह पाया कि सीमा की दहेज को लेकर हत्या की गई थी। कोर्ट ने पति आशीष को दहेज हत्या, दहेज उत्पीड़न आदि धाराओं में दोषी पाते हुए सजा सुनाया।