सिरकोनी। कजगांव स्थित कजरहवा पोखरा पर लगने वाला ऐतिहासिक कजरी का मेला 31 अगस्त को लगेगा। मेले में दुल्हन पाने के लिए दूल्हा पक्ष के घर मटमंगरा आदि का रस्म पूरा कराया जा रहा है। दुल्हन पाने की आस लिए हुए दूल्हे के रूप में नजर आने वाले लोगों के घर हल्दी आदि कि रस्म पूरी कराई जा रही है। कजरहवा पोखरे पर दुल्हन की विदाई के लिए कजगांव और राजेपुर गांव के आधा दर्जन दूल्हा इस ऐतिहासिक पोखरे पर आते हैं। विवाह की रस्म को बखूबी पूरा किया जा रहा है। रात को औरतों द्वारा मंगलगीत गाया जाता है। मटमंगरा की रस्म राजेपुर के प्रदीप जायसवाल के दरवाजे पर पूरी की गई। लगभग पांच पीढ़ी से यह रस्म उनके दरवाजे पर पूरी की जाती है। इस ऐतिहासिक मेले में राजेपुर और कचगांव के बीच दुल्हन की विदाई को लेकर पोखरे के इस पार और पोखरे के उस पार से दूल्हों के बीच काफी नोकझोंक होती है। दूल्हा हाथी घोड़े पर बैंडबाजे के साथ दोनों तरफ से आते हैं। काफी भीड़ होती है। दूर-दूर से लोग ऐतिहासिक कजरी का मेला देखने आते हैं। पुलिस फोर्स काफी चाक-चौबंद रहती है ताकि कोई घटना दुर्घटना ना हो। हर बार बिना दुल्हन की विदाई के ही बरात बैरंग लौट जाती है और मेला समाप्त हो जाता है।