जौनपुर। नगरपालिका परिषद की लापरवाही का खामियाजा शहर के लाखों लोगों को भुगतना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि बारिश के बाद दस से अधिक मोहल्लों में सड़कों पर पानी जमा हो जाता। जिसकी वजह से न तो छात्र स्कूल जा पाते और न ही लोग घरों से निकल पाते है। सैकड़ों घरों में तो पानी जमा होने से लोग परेशान हो जाते है। जबकि नगरपालिका सफाई के नाम पर लाखों रूपये हर माह कागजों में खर्च तो करती है। लेकिन सफाई का कोरम सिर्फ पूरा किया जाता है। शहर का मुख्य नाला भैसापुर नाले की बीस सालों से सफाई नगरपालिका ने नहीं कराया। कारण इस नाले पर रसूखदारों ने कब्जा कर इमारतें खड़ी कर लिया है।
शहर में वैसे तो कई नाले एवं नालियां है। लेकिन इसमें म़ुख्य 31 नाले ऐसे है। जिसकी बरसात से पहले सफाई होनी चाहिए। इसमें ओलंदगंज पुल के उस पार नाला ,मछली मार्केट , भैसासुर नाला , आबकारी रोड नाला, कटघरा नाला ,बलुआ घाट नाला, सिपाह नाला, ईसापुर नालें आदि है । इन नालों की सफाई पूरे वर्ष में मात्र एक बार की जाती है। भैंसापुर नाले से होकर पूरे शहर का पानी जाता है। इसे वाजिदप़ुर से जेसीज चौराहे तक लोगों ने पाट दिया है। होटल, नर्सिंग होम, बहुमंजिली इमारतें इसी नाले के ऊपर लोगों ने बना लिया है। जिसकी वजह से परमानतपुर, चांदमारी, अहमद खां मंडी, वाजिदपुर, कालीकुत्ती सहित कई मोहल्ले पानी में डूब जाते है। सैकड़ों लोगों के घरों में पानी जमा हो जाता है। देखा जाए तो रोडवेज, जज कालोनी, सद्भावना पुल, रूहट्टा, मछलीशहर पड़ाव, कोतवाली, नईगंज सहित कई इलाकों में नाले पट गए है। जिसकी वजह से पानी का बहाव नहीं हो पाता। और पानी सड़कों पर पसर जाता है।
नालों की सफाई अप्रैल से लेकर जून के बीच में की जाती है। नालों की सफाई अपने स्वयं के संसाधनों से नगरपालिका परिषद कराता है। बारिश से पहले कई नालों की सफाई कराई है। पूरे वर्ष में एक बार ही नालों की सफाई होती है। भैसापुर नाले पर अतिक्रमण की वजह से सफाई नहीं हो पाती है।
कृष्णचंद्र
अधिशासी अधिकारी
नगरपालिका परिषद