जौनपुर। हुुसैनाबाद मोहल्ले में अवैध स्वाधार गृह के मामले में प्रशासन की पेंच फंस सकती है। जिस गृह को प्रशासन अवैध बता रहा है। उसे संचालक ने वैद्य बताया है। उधर डीएम द्वारा गठित तीन अधिकारियों की टीम बुधवार की देर शाम तक स्वाधार गृह में रह रही महिलाओं से घूमा फिराकर पूछताछ करती रही कि कहीं कुछ उन्हें क्लू मिल जाए। सूत्रों की मानें तो कोई खास कमी पूछताछ के दौरान सामने नहीं आई है। देर शाम को राज्य महिला आयोग की सदस्य अनीता सिंह भी स्वधार गृह जांच करने पहुंची और जांच का कोरम पूरा कर चलता बनीं। प्रशासन वैसे महिलाओं को उनके घरों को भेजने की तैयारी में जुटा है। डीएम का कहना है कि जो महिलाएं घर नहीं जाएगी उन्हें वाराणसी, बलिया एवं इलाहाबाद भेजा जाएगा।
देवरिया की घटना के बाद पूरे प्रदेश में स्वाधार गृहों की जांच शुरू हो गई है। इसी क्रम में मंगलवार को डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी जांच करने अधिकारियों ने साथ पहुंचे। जहां 13 महिलाएं मिलीं। उनके साथ नौ बच्चे भी थे। डीएम ने कागजात नहीं दिखाएं जाने पर स्वाधार गृह बंद करने का निर्देश संचालक को दिया और दूसरी तरह जांच बैठा दी। जांच की प्रभारी एसडीएम सदर प्रियंका प्रियदर्शिनी को बनाया गया। उनके साथ बीडीओ प्रीती तिवारी, एसओ महिला तारावती यादव दिन भर महिलाओं से पूछताछ कर उनका बयान लिखती रहीं। बुधवार को महिलाओं की संख्या 18 की हो गई। जबकि मंगलवार को 13 महिलाएं मिली थीं। जांच टीम ने संस्था के कागजात भी देखा। और उसकी जांच पड़ताल किया। सूत्रों की मानें तो महिलाओं ने कहा कि वह ससुराल से भगाई गई है। मायके वाले उन्हें नहीं लेने को राजी है। ऐसे में वह जाएं कहां। किसी भी महिला ने कोई गंभीर शिकायत नहीं किया और न ही कोई आरोप लगाया। संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्ष 2005- 06 से संस्था संचालित है। जिला प्रोवेशन कार्यालय एवं निदेशालय महिला कल्याण से बराबर पत्राचार भी होता आ रहा है। अगर संस्था अवैध थीं तो इसके लिए नोटिस क्यों नहीं दिया गया। जून 18 तक प्रोवेशन अधिकारी के भेजें हुए पत्र है। अभी कुछ ही दिन पूर्व बाल कल्याण समिति ने लिखित रूप से एक महिला को भेजकर रखवाया था। पिछले फरवरी 17 में शासन बजट भी आया था। जिसे प्रोवेशन कार्यालय ने आपत्ति लगाकर लौटा दिया। प्रश्न यह है कि संस्था के बारें में पूरी जानकारी प्रोवेशन कार्यालय को है तो इस बात को क्यों छिपाया गया। जो भी जांच अभी चल रही है। रिपोर्ट के बाद ही यह तय हो सकेगा कि स्वाधार गृह अवैध है या वैध। जांच अधिकारी एसडीएम सदर प्रियंका प्रियदर्शिनी का कहना है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पुरी होने के बाद रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी। संस्था के बारे में वहीं निर्णय लेंगे।
डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी का कहना है कि एक महिला आजमगढ़ की है। बाकी सभी जिले की है। उन्हें उनके घर भेजा जाएगा। अगर वह नहीं गई तो उन्हें वाराणसी, बलिया, इलाहाबाद स्थित स्वाधार केंद्र भेजा जाएगा।