जौनपुर। रक्तदान को लेकर अभी भी लोगों के मन में भ्रम है। जबकि रक्तदान महादान है। रक्त के एक यूनिट से लाल रक्त कोशिकाएं, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और क्रायोप्रेसिपीटेट चार अवयव बनते हैं। रक्तदान 18 से 65 वर्ष का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति कर सकता है। इसे हर तीन माह के अंतराल पर किया जा सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि रक्तदान से कमजोरी नहीं होती। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से 26 जुलाई को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में आयोजित रक्तदान शिविर में एक यूनिट ब्लड देकर आप भी महादानी बन सकते हैं। रक्तदान से पुण्य कार्य कोई नहीं है। सैकड़ों लोगों ने रक्तदान को अपने जीवन का मिशन बना लिया है। डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि रक्तदान नेक काम है। आप भी अगर चाहते हैं तो स्वेच्छा से रक्तदान कर सकते हैं। उन्होंने आम लोगों से भी रक्तदान करने की अपील किया है।
मंगलवार को 28 लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन
जौनपुर। रक्तदान करने वालों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। कारगिल विजय दिवस पर अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में रक्तदान करने के लिए मंगलवार को 28 लोगों ने रक्तदान करने के लिए अपना पंजीकरण कराया। पंजीकरण कराने वालों में सहायक चकबंदी अधिकारी डा. शांता तिवारी, कांग्रेस के कोआर्डिनेटर अनिल सोनकर गांगुली, विनोद सोनी, जूनियर शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुशील उपाध्याय, उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय, जेसीआई की अध्यक्ष चारू शर्मा, सचिव कल्पना केसरवानी, अंजू पाठक, श्री वंश सिंह, सारिका सोनी, आनंद निषाद, संजय शाही, बृजेश गुप्ता, प्रियंका कुशवाहा, निशिकांत द्विवेदी, सर्वेश गुप्ता, कुंदन शुक्ल, विक्रम सिंह, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री रवि चंद्र यादव, अरविंद मौर्य, राहुल साहू, विकास केसरवानी, मुकेश दूबे, नईगंज के सुनील उपाध्याय, उनकी पत्नी किरन उपाध्याय, चंदन दूबे आदि प्रमुख हैं।
रक्तदाताओं को मिलेगा प्रमाण पत्र
जौनपुर। रक्तदान करने वालों को अमर उजाला फाउंडेशन प्रमाण पत्र देकर सम्मानित करेगा। सीएमएस डा. एसके पांडेय का कहना है कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान स्त्रत्त्करने वालों को कार्ड मिलेगा। जिस पर छ: माह के अंस्त्रत्त्दर रक्तदाता ब्लड बैंक को कार्ड देकर एक यूनिट ब्लड किसी भी ग्रुप का प्राप्त कर सकते हैं।
रिक्शावाले को बचाने के लिए शुरू किया रक्तदान
जौनपुर। सरपतहां के रूधौली निवासी अखिल कुमार गुप्ता भी कारगिल विजय दिवस पर तीसरी बार रक्तदान करेंगे। इनका कहना है कि वाराणसी में छ: साल पहले एक रिक्शावाले को पकड़कर रक्तदान के लिए दो पुलिस वाले ले जा रहे थे। अखिल ने रिक्शे वाले को छुड़ाकर खुद रक्तदान किया। तभी से रक्तदान करने के लिए प्रति मन में जज्बा पैदा हो गया। उनका कहना है कि इसके बाद उसने हर साल रक्तदान करने का निर्णय लिया। अभी तक उसके रक्तदान करने से सुमन देवी, गुलाब सोनी, अरविंद गौतम, रामनाथ तिवारी के परिवार की महिला की जान बच चुकी है।