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‘रूठ हम सबसे जाने क्यूं बरसात गइल’

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थानागद्दी (जौनपुर)। क्षेत्र के भैंसा गांव में बुधवार की रात्रि अक्षर आरसी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति के बैनर तले कवियों ने देर रात्रि तक कविता पाठ एवं मुशायरे से श्रोताओं को बांधे रखा। साहब लाल सहज ने सूखे से ग्रसित किसानों की पीड़ा को कविता के माध्यम से कुछ इस तरह बया किया। ‘बेहन खेत झुराने से सावन के रिसियाने से चले न भइया कउनो चारा, मानसून भी धरा किनारा किसान बेचारा हिम्मत हारा’। इसके पूर्व पवन पांडेय की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
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‘कई बरसों से उड़ता रहा मैं ओ परिंदा हूँ’ गजल को जब अशोक सिंह घायल ने आवाज दी तो सभी मंत्रमुग्ध हो गए। सूबेदार पांडेय ने श्रोताओं में जोश भरते हुए सैनिकों की शहादत पर नज्म पढ़ी ‘पहना होगा तिरंगे का कफ़न हमनी खातिर वतन की आबरू उसने ही बचाई होगी’। संचालक बहादुर अली खान मीनाई इंसानियत पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘आ तुझे बताऊं मेरी नजर क्या तलाश करती हैं, अपने वतन के खातिर दुआ तलाश करती हैं, दिल मोहब्बत तलाश करता अक्ल तो मुद्दा तलाश करती है’। नंदलाल समीर की कविता में भी वर्षा नहीं होने से नुकसान की पीड़ा साफ झलकी। उन्होंने सुनाया कि ‘मुरझाइल फुलवा सूख पेड़वन क पात गइल, रूठ हम सबसे जाने क्यूं बरसात गइल’। भ्रष्टाचार पर बोलते हुए समीर ने कहा ‘असली पे नकली फर्जी भ्रष्टाचार क बोलबाला बा’। पवन जौनपुरी ने आज के नेताओं पर प्रहार करते हुए कहा ‘काश मैं नेता होता, धर्म जाति का भेद बताकर कत्लेआम कराता’। बहादुर अली खान ने बीच-बीच में हास परिहास भरे मुशायरे सुनाकर श्रोताओं को जहां खूब गुदगुदाया। वहीं, दिलकश आवाज में गजलें सुनाकर झूमा दिया। बतौर मुख्य अतिथि उमाशंकर सिंह से नहीं रहा गया तो उन्होंने भी अपनी रचना पढ़ी ‘आदमी होता है इंसान बड़ी मुश्किल से, जीते जी ढक नहीं सके तन को कभी जो लोग उनको शिकायत है कि कफ़न ठीक नहीं’ रचना खूब सराही गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व प्रमुख उमाशंकर सिंह, अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य मदन मोहन शुक्ल और संचालन डा. बहादुर अली खान मीनाई ने किया। कार्यक्रम में नरेंद्र पांडेय, जगदीश पाठक आदि उपस्थित रहे।
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