जौनपुर। बादलों की बेरुखी से खेती धान की खेती पिछड़ गई है। अबकी बार औसत से महज एक चौथाई ही बारिश हुई है। इसके चलते महज 20 फीसदी रकबे में ही धान की रोपाई हो पाई है। वहीं खरीफ के अन्य फसलों की भी बुआई भी प्रभावित हुई है। इससे किसान चिंतित है। उनको सूखे के आसार दिख रहे हैं।
जिले में जून से लेकर 17 जुलाई तक औसतन 250 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए लेकिन इस साल इस अवधि में 66.5 मिलीमीटर ही बारिश हुई है। खेतों की जुताई तो हो गई लेकिन खेतों में इतना पानी नहीं हुआ की धान की रोपाई हो सके। इसके चलते लगभग 80 फीसदी धान की रोपाई नहीं हो पाई है जबकि बमुश्किल से धान की रोपाई के लिए एक हफ्ते बचे हैं। जिले में एक लाख 59 हजार 121 हेक्टेयर भूमि में धान की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके सापेक्ष मात्र 20 फीसदी खेत में धान की रोपाई हुई है। मक्का की खेती 47130 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 85 फीसदी, ज्वार की खेती 3012 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 70 फीसदी, बाजारा की खेती 4947 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 40 फीसदी, अरहर की खेती 8745 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 70 फीसदी, तिल की खेती 575 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 50 फीसदी ही हो पाई है। कुल दो लाख 29 हजार 217 हेक्टेयर में खरीफ की खेती का लक्ष्य निर्धारित है। मगर कम वर्षा के कारण 25 हजार 729 हेक्टेयर में खरीफ के फसलों की खेती हुई है। शुरुआत में बारिश होने पर किसानों ने बुवाई शुरू कर दी थी। खेतों की जुताई शुरू कर दी गई। मक्का, मूंग, आदि की बुआई हो चुकी है। धान के खेत की भी तैयारी शुरू हो गई थी लेकिन बादलों की बेरुखी ने किसानों को निराश कर दिया।
पिछले साल से भी कम वर्षा
जौनपुर। पिछले साल जून व जुलाई माह के बीच कम वर्षा हुई थी। औसतन 250 मिमी की तुलना में महज 129.4 मिमी वर्षा हुई थी। इस साल तो उसके भी आधा पानी बरसा है। महज 66.5 मिलीमीटर बारिश हुई है। उप निदेशक कृषि जयप्रकाश का कहना है कि इस साल औसत वर्षा के महज 26.5 फीसदी ही बारिश हुई है।
किसान कर खाली खेतों में कर दें तिल व अरहर की बुआई
जौनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक सुरेश कुमार कन्नौजिया ने कहा कि अगर चार -पांच दिनों में बारिश नहीं हुुई तो जिला सूखे की चपेट में आ जाएगा। धान की रोपाई करने के लिए उचित समय भी समाप्त हो जाएगा। धान के रोपाई करने का उचित समय 20 जून से 20 जुलाई ै। इसे बाद धान की रेट बरायटी की रोपा की जाती है। लेकिन बारिश नहीं होने से उसकी भी रोपाई बाधित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान खाली पड़े खेतों में तिल व अरहर की बुआई कर सकते हैं।