जौनपुर। बीटीसी संयुक्त मोर्चा ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद(एनसीटीई) द्वारा 28 जून 2018 की अधिसूचना में किए गए संशोधन के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दी है। बीटीसी संयुक्त मोर्चा के सदस्यों ने कहा है कि एनसीटीई के नए फरमान से उनका हक मारा जाएगा।
शुक्रवार को नव दुर्गामंदिर विसर्जन घाट पर हुई बीटीसी संयुक्त प्रशिक्षु मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार यादव ने कहा कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई ने अदिसूचना जारी करते हुए कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रारंभिक शिक्षाशास्त्र में दो वर्षीय डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों को योग्य माना गया। लेकिन 28 जून 2018 की अधिसूचना में संशोधन करते हुए प्रारंभिक शिक्षाशास्त्र में दो वर्षीय डिप्लोमाधारी तथा चार वर्षीय प्राथमिक शिक्षा शास्त्र स्नातक डिग्री धारी अभ्यर्थियों को चयन में प्राथमिकता देने की बात कही गई है। उन्होंने ने कहा कि इस व्यवस्था से बीएड डिग्री धारी भी प्राइमरी में शिक्षक बन जाएंगे। इससे बीटीसी प्रशिक्षुओं का हक मारा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीटीसी, डीएलएड, डिप्लोमा में प्रशिक्षण ले चुके करीब दो लाख अभ्यर्थी बेरोजगार हैं। वर्ष 2019 में इनकी संख्या पांच लाख के पार हो जाएगी। ऐसे में बीएड अभ्यर्थियों को छह माह का ब्रिज कोर्स कराना निरर्थक और बीटीसी व डीएलएड डिग्री धारकों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार अगर 28 जून 2018 की अधिसूचना में संशोधन को वापस नहीं ली तो बीटीसी प्रशिक्षु मोर्चा आंदोलन को बाध्य होगा। इस मौके पर विवेक पाठक, गौरव यादव, विक्रम सिंह, संदीप मिश्र, विवेक गुप्ता, सर्वेश मिश्र, दुर्गेश जायसवाल, नितेश यादव, हसन अब्बास, अक्षय पांडेय, रेश्मी, दीपा, शिखा आदि मौजूद थे।