जौनपुर। खेतों में अपशिष्ट जलाने तक पर रोक है लेकिन नगर पालिका शहर में कचरा जलाकर प्रदूषण फैला रही है। शहर में कूड़ा निस्तारण की कोई समुचित व्यवस्था न होने के चलते शहर में निकलने वाला कूड़ा सफाई कर्मचारी सड़कों के किनारे डंप कर देते हैं और उसमें आग लगा दी गई है। जिससे उन इलाकों के लोगों का दम घुट रहा है। लेकिन नगरपालिका प्रशासन को इसती चिंता नहीं है।
शहर में रोजाना 90 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। नगर पालिका के पास कचरा निस्तारण का कोई बंदोबस्त नहीं है। वार्डों से कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी सफाई कर्मचारियों की है। सफाई कर्मचारी मुहल्लों से कूड़ा लाकर सड़क पर कहीं एकत्र करते हैं जहां से नगर पालिका के कर्मचारी ट्रैक्टर पर लादकर शहर में सड़कों के किनारे खाली पड़े स्थानों पर गिरा देते हैं। नतीजा यह कि नगर में वाजिदपुर से लेकर सिपाह तक जगह जगह सड़क की दों पटरियों पर कूंड़ों का ढेर लगा हुई है। इसके अलावा नगर में कटघरा मोहल्ले में गोमती नदी के किनारे, पचहटिया से चौकिया रोड पर भी कई स्थानों पर कूड़ा डंप किया जाता है।
सड़क के किनारे, घनी आबादी वाले इलाकों की खाली मैदान में तो कचरा डंप किया ही जाता है। नगर पालिका के कर्मचारी शहीद भगत सिंह पार्क तक को नहीं बख्शते जबकि यह पार्क अमृत योजना के तहत सुंदरीकरण के लिए चुना गया है। जब कूड़े का ढेर एकत्रित हो जाता है तो प्रतिबंध के बावजूद कर्मचारी आग लगा देते हैं। धुएं के चलते आसपास के लोगों का जीना मुहाल हो जाता है लेकिन इसकी परवाह नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों को नहीं। मंगलवार को सिपाह स्थित सेंट पैट्रिक स्कूल के सामने, पचहटिया में शाहगंज रोड पर, सिपाह क्रासिंग के पास, शीतला धाम चौकिया मोड़, कुत्तूपुर रेलवे क्रासिंग के पास आदि स्थानों पर कचरा जलाया जा रहा था। पूरा इलाका जहरीले धुएं से भरा रहा।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी कृष्ण चंद्र का कहना है कि कूड़े के निस्तारण का कोई समुचित स्थान नहीं होने पर उसे जहां-तहां एकत्रित करना पड़ रहा है लेकिन उसमें नगर पालिका की ओर से आग नहीं लगाई जाती है। यह किसी शरारती तत्व का काम होता है। वह कोई भी तर्क दें लेकिन हकीकत यह है कि कूड़े में आग लगाई जा रही है और इससे लोगों को तकलीफ हो रही है। चिकित्सक डा. हरेंद्र देव सिंह का कहना है कि धुएं में कार्बन डाइऑक्साइड व कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस होती है। दोनों ही गैसें जहरीली हैं। इन गैसों की अधिकता से सांस से बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। प्लास्टिक, टायर व इलेक्ट्रॉनिक्स आदि का कबाड़ जलाने से उठने वाला धुआं कैंसर व एलर्जी का कारक हो सकता है।
कूड़े में प्लास्टिक बहुत नुकसानदायक हैं। नगर निकायों को घरों व सफाई से निकलने वाले कूड़े को श्रेणीवार अलग करने की व्यवस्था कराने की जरूरत है। कूड़ा न जलाया जाए, इसके लिए निकायों को नोटिस दिया गया है। ऐसा होने पर सीधे ईओ जिम्मेदार होंगे।
अरविंद मलप्पा बंगारी, डीएम