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कर्ज माफी के इंतजार में, हजारों किसान

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जौनपुर। फसली ऋण योजना के एक साल बीतने को आए बैंकों और कृषि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते अभी भी 28,835 कर्ज मुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कर्ज जमा नहीं होने के कारण इन किसानों का फसली ऋण खाते का नवीनीकरण नहीं हो पाया है। किसानों के विरोध के बाद अब कृषि विभाग ने इन किसानों की सूची बैंकों को जांच के लिए भेजी है। जांच के बाद ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होगी तब तक ये किसान बैंकों से खेती के लिए और कर्ज नहीं ले पाएंगे।
सरकार द्वारा फसली ऋण मोचन योजना के तहत किसान क्रेडिट कार्ड पर ऋण लेने वाले किसानों का ऋण माफ करने की घोषणा की थी। जगह-जगह शिविर लगाकर जनप्रतिनिधियों और भाजपा नेताओं ने ऋण मुक्ति का प्रमाणपत्र बांटा। जाहिर है कि इससे पहले बैंकों से डाटा लेकर कृषि विभाग ने ऋण माफी की सूची बनाई थी। उसकी जांच कराई और शासन को ऋण माफी योग्य किसानों का विवरण भेजा और ऋण माफी की मंजूरी मिली। कर्ज लेने वाले किासनों की जांच लेखपालों से कराई गई। बैंकों ने कुल 98 हजार 831 किसानों को ऋण माफी के लिए चुना था, जिसमें 69 हजार 996 किसानों का तीन अरब 92 करोड़ 14 लाख रुपया माफ किया गया है। यह लेखपालों की मनमानी के चलते 28 हजार 831 किसानों का कर्ज माफ नहीं हो पाया। अब कृषि विभाग ने शेष किसानों की सूची बैंकों को भेजी है।
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फसली ऋण मोचन योजना के तहत 31 मार्च 2013 के पहले किसानों का ऋण माफ किया जाना था। इसके तहत ऐसे लघु एवं सीमांत किसानों का ऋण माफ होना था, जिन पर एक लाख तक का ऋण बकाया हो, जिनके खाते का नवीनीकरण न हुआ हो और कई बैंको से लोन न लिया हो। कृषि विभाग का कहना है कि जिन किसानों का ऋण नहीं माफ हो पाया, उनके साथ मानक में कुछ न कुछ कमी थी। मगर जब कमी थी तो दोबारा जांच का औचित्य क्या है।
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जिन किसानों का ऋण माफ नहीं हो पाया है। उनकी फिर से जांच करने के लिए सूची बैंकों को भेजी गई है। बैंक जिन किसानों अर्ह पाएंगे, उनका कर्ज माफ किया जाएगा। -अमित कुमार चौबे, जिला कृषि अधिकारी
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