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समस्या का निदान पैमाइश के बाद ही संभव- एडीएम

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जौनपुर। लखेसर गाव में 28 साल से शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया अभी भी पैमाइश को लेकर उलझी हुई है।इस गांव में 15 साल पहले चक कट गई। लेकिन पैमाइश को लेकर काश्तकारों में आपसी विरोध होने से मारपीट की नौबत कई बार आ चुकी है। जिसके कारण गांव में पैमाइश आधी अधूरी ही रह जा रही है। इस समस्या को देखते हुए अपर जिला धिकारी रमेश चंद्र मिश्र व उप संचालक चकबंदी ने शुक्रवार को दोपहर गाव में पहुचकर कर चौपाल लगाया। जिसमे पूरे गाव के काश्तकारों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों के दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी समस्या को बताया।
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अपर जिलाधिकारीरमेश चंद्र मिश्र ने कहा कि किसान के खेतों की पैमाइश होने में ही समस्या का निदान है। उप संचालक चकबन्दी बच्चे लाल ने कहा कि गांव की पैमाइश हो जाने के बाद किसान अपनी समस्या लेकर निगरानी करे। मैं उसका निस्तारण कर दूंगा। किसानों ने बताया कि उक्त गाव में 28 साल से चकबंदी प्रक्रिया लंबित है।जिससे बस्तियों में जाने के लिए चकरोड व नाली नहीं बन पा रही है। ग्राम प्रधान निशा तिवारी ने बताया कि कई मकान भी बन गए है और कुछ कब्जा परिवर्तन होने से लोग नई चक में जोताई बुआई भी कर रहे हैं। कुछ लोग अभी पैमाइश न होने से परेशान है। ऐसे में पैमाइश से ही निदान हो सकेगा। वही पैमाइश रोकने के पक्षधर किसानों ने भी बताया। कि यहां पर चकबंदी में दिक्कत है। हमारी जमीनों को गलत मलियत लगाया गया है। उन्हें चक परे कर दिया जाए। तभी जमीन की पैमाइश किया जाय। बहरहाल उक्त गांव में कई साल से कई बार पैमाइश शुरू हुई। लेकिन आपस में विवाद हो जाने के कारण पैमाइश संभव नहीं हो पाई है। इस कड़ी में शुक्रवार को उक्त अधिकारियो ने चौपाल लगाकर किसानों को आश्वस्त किया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसानों के अलावा सहायक चकबंदी अधिकारी राकेश बहादुर सिंह, कानूनगो अजय श्रीवास्तव, लेखपाल साथ ही शांति व्यवस्था के लिए चौकी प्रभारी भीलमपुर अरुण राय, एसआई हीरामणि यादव पुलिस बल के साथ उपस्थित रहे।
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