जौनपुर। जिले में चार वर्षो में दो लाख 88 हजार 480 पौधे सूख गए हैं। पौधों के सूखने का कारण उनके देखरेख की समुचित व्यवस्था नहीं होना है। सिंचाई व सुरक्षा के अभाव में हर साल लगभग 20 पौधे सूख जाते हैं। ऐसे में हर वर्ष हजारों रुपये का नुकसान सरकार को होता है। जबकि हर साल लाखों रुपये खर्च पौधों को लगाने का कार्य किया जाता है। इसके सुरक्षा के लिए जिम्मेदार वन विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए हर साल लाखों पौधे लगाने का कार्य किया जाता है। जुलाई माह में अभियान चलाकर पौधों को लगाने का कार्य किया जाता है। इन पौधों के सुरक्षा का कार्य नहीं किया जाता है जिससे हर साल हजारों पौधे सूख जाते हैं। जिससे सरकार को लाखों रुपये की क्षति भी होती है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार वर्षों में कुल 14 लाख 42 हजार 401 पौधे लगाए गए थे। जिसमें से लगभग दो लाख 88 हजार 480 पौधे सूख गए हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 में 336 हेक्टेयर भूमि में कुल तीन लाख 10 हजार 801 पौधे लगाए गए थे। जिसमें से 62 हजार 160 पौधे सूख गए हैं। वित्तीय वर्ष 2015-16 में 4321.60 हेक्टेयर भूमि में कुल तीन लाख 32 हजार 601 पौधे लगाए गए हैं। जिसमें से 66 हजार 520 पौधे सूख गए। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 572.25 हेक्टेयर भूमि में कुल पांच लाख 33 हजार पौधे लगाए गए। जिसमें से एक लाख छह हजार 600 पौधे सूख गए हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 200 हेक्टेयर भूमि में दो लाख 66 हजार पौधे लगाए गए। इन पौधों को लगाने में कुल 70 लाख रुपये भी खर्च किए गए थे जिसमें से लगभग 26 हजार 600 पौधे सूख गए हैं।
पौधों के सुरक्षा की नहीं है समुचित व्यवस्था
जौनपुर। जिले में कागजों पर ही पौधों के देख रेख करने का कोरम पूरा किया जाता है। वन विभाग के पास पौधों की देख रेख करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। पौधों की देख रेख करने के लिए वन विभाग के पास सिर्फ ताड़-बाड़ व खाई खोदने के अलावां कोई उपाय नहीं है। यहां तक कि पौधों को सिंचाई की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण हर साल लाखों रुपये के पौधे लगने के बाद सूख जाते हैं।
हर साल लगभग 20 फीसदी पौधे सूख गए हैं। पौधों की सुरक्षा के लिए ताड़बाड़ व खाई खोदने व पशु रक्षक रखा जाता है। इसके अलावा हमारे पास पौधों की सुरक्षा के और कोई इंतजाम नहीं है।
एपी पाठक
प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी