जौनपुर। शांति कुंज हरिद्धार के संत भृगु ने कहा कि जिस प्रकार यज्ञ करते समय भगवान का स्मरण करते हैं और जिस प्रकार यज्ञ कुंड में पहुंची समस्त श्रेष्ठ आहुतियां भस्मीभूत हो जाती हैं, ठीक उसी प्रकार हमारा नश्वर शरीर भी एक दिन भस्मीभूत हो जाएगा। इसी बात को सदैव अपनी स्मृति में बनाए रखते हुए हमें सदैव श्रेष्ठ कार्य करना चाहिए। वह गायत्री मंदिर परिसर में आयोजित नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ के दौरान प्रवचन कर रहे थे। स्वार्थपरता को त्यागकर मन, वचन और कर्म से परमात्मा को साक्षी मानकर सदैव परोपकारी बनने का प्रयास करना चाहिए। इससे पहले सुबह कार्यक्रम की शुरूआत योग से हुई। दैवीय आनंद से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। इस दौरान, बच्चों का यज्ञोपवीत, अन्न प्राशन, विद्यारंभ कराया गया। यज्ञ के बाद आयोजित किए गए भंडारे में प्रसाद वितरण किया गया। संगीतमय प्रवचन का आयोजन शाम पांच बजे से किया गया। संत देशबंधु पद्माकर मिश्र ने कहा कि प्रज्ञा का मतलब है ज्ञान, अर्थात हमारे अंदर जब ज्ञान का समावेश होगा तो प्रकाश से पूरा जीवन आनंदित हो जाएगा। जब कर्मयोगी का भाव आता है तो सांसारिक व्याधियां दूर हो जाती हैं। इस मौके अधिवक्ता अभिषेक मिश्र ने श्रद्धालुओं से चार दिवसीय कथा को संपन्न कराने में सहयोग की अपील की। कार्यक्रम में ऋचा शाह, शिखा सिंह, अजय साह, अजय आदि मौजूद रहे।