केराकत। विकास खंड में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा बनवाए गए पांच एएनएम सेन्टर के भवन का निर्माण पूरा होने के बाद भी उसे स्वास्थ्य विभाग को नहीं सौंपा नहीं गया। कुछ सेंटर तो झाड़ियों और घासफूस से इस कदर घिरे हैं कि उनमें दिन के समय भी प्रवेश करना मुश्किल है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत गांव की गर्भवती व प्रसूता महिलाओं को अपने नजदीकी स्थान पर ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करने के उद्देश्य से ग्रामीण इलाकों में इस तरह के एएनएम सेंटर के लिए भवन बनवाएं जा रहे थे। लगभग दस वर्ष पूर्व उदयचंद पुर , सोहनी , पारकपाटी डेहरी, और परमानंदपुर गांव में बने भवनों पर लगभग चालीस लाख खर्च हुए हैं। ग्राम प्रधान व एएनएम के संयुक्त खाते से निर्मित भवनों के निर्माण में चार चरणों मे भुगतान होना था. अंतिम किस्त के भुगतान के बाद जो कि पानी व बिजली के कनेक्शन के बाद इन भवनों को स्वास्थ्य विभाग को सौंपा जाना था। बताते हैं कि तभी ग्राम पंचायत का चुनाव आया और प्रधान बदल गए और दूसरे प्रधानों ने इसमें किसी तरह का रुचि नहीं दिखाया। भवन विभाग को सौंपा नहीं जा सका और अंतिम किश्त का भुगतान आज भी विभाग के पास पड़ा हुआ है। गांव में एएनएम सेन्टर चलाने के लिए 3000 रुपए प्रति वर्ष भुगतान होता है। इस बारे में सीएचसी प्रभारी डा. विशाल सिंह यादव ने कहा कि यह बहुत पुराना मामला है। इसकी जानकारी मिली है। विभाग के खाते में आज भी पैसा पड़ा है। जल्द ही वह प्रयास कर इस मामले का हल निकालेंगे।