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अनुकरीण है श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता

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जलालपुर। कथा व्यास प्रमोद त्रिवेदी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती आज भी सभी के लिए मिसाल है। गुरु के साथ कपट और मित्र के संग चोरी करने वाला दरिद्र हो जाता है। आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान सुदामा ने अपने मित्र कृष्ण की नजर बचाकर गुरु के दिए चने अकेले ही खा लिए जिससे वे दरिद्रता को प्राप्त हुए। तालामझवारा गांव में अमला पांडेय के आवास पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर उन्होेंने कहा कि सुदामा ने एक दिन पत्नी को अपनी और भगवान कृष्ण की दोस्ती के बारे में बताया। सुदामा की पत्नी ने उन्हें कृष्ण जी के पास जाकर जीवन निर्वाह के लिए कुछ धन लाने को कहा। द्वारिकापुरी में भगवान कृष्ण ने बचपन के मित्र सुदामा की खूब खातिरदारी की और सुदामा के प्रेम में मगन होकर आंसुओं से उनके पैर धो डाले। इसके बाद भगवान ने सुदामा को अलौकिक वरदान देकर घर भेजा। सुदामा चरित्र की झांकी देखकर पंडाल में उपस्थित सभी की आंखे नम हो गयी। इस दौरान मंच पर मंचासीन आचार्य का आयोजक अमला पांडेय ,बृज नारायण, सूर्यमणि पांडेय, ज्योति प्रकाश अम्बुज,शिव प्रकास, सत्यप्रकाश, वेदप्रकाश, श्रुति प्रकाश, अम्बुज, पंकज, नीरज आदि लोगों ने सम्मानित किया।
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