बक्शा। सुजियामऊ गांव में स्थित श्रीमहाकाली मंदिर में पारंपरिक गीतों के संरक्षण का काम किया गया। कलाकारों बच्चों को लोक गायन का प्रशिक्षण दिया। दस दिवसीय प्रस्तुतिपरक लोक गायन कार्यशाला का रविवार को समापन किया गया। इसमें कुल 42 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में लोक गायन की विद्या को सहेजने व उसे प्रस्तुतिकरण हेतु प्रशिक्षित किया गया। समापन समारोह में पूर्व ब्लॉक प्रमुख श्रीपति उपाध्याय ने कहा कि लुप्त हो रही संस्कृति की इस विधा का संरक्षण एक चुनौती है। गांव की लुप्त हो चुकी गीत गायन को संरक्षित किया जाना प्रशंसनीय कार्य है। कार्यशाला में रामायण की पुरानी विद्या वीर बानी, दशरथी बानी, पुष्प वाटिका में रस वाणी, लंका में वीर रस, लोकगीत में कमली, पूर्वी, कहरवा दादरा, खेमटा बोल और विलुप्त हो रहे फाल्गुनी गीत जैसे होली, चैता, फाग, चहका, चौताल को सिखाया गया। इस दौरान गायक प्रज्ञा चक्षु बाबू बजरंगी सिंह, रामआसरे तिवारी, डॉ. मनोज मिश्र, ओम उपाध्याय, दुर्गेश उपाध्याय, धर्मदत्त उपाध्याय, ठोल वादक, कृष्णानंद उपाध्याय, डब्लू उपाध्याय, रज्जु उपाध्याय, कैलाश शुक्ल, रामनवल शुक्ल, बड़कऊ उपाध्याय, विद्यानंद उपाध्याय, बनवासी महाराज आदि मौजूद रहे। संचालन शिवानंद उपाध्याय ने किया।