जौनपुर। विकास भवन परिसर स्थित क्रांति स्तंभ पर जलियांवाला बाग के शहीदों को मंगलवार को श्रद्धांजलि दी गई। हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी एवं लक्ष्मीबाई बिग्रेड के कैडरों ने क्रांतिवीर सरदार ऊधम सिंह के 78वें बलिदान दिवस पर मोमबत्ती जलाकर दो मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित किया। बिग्रेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि 13 अप्रैल 1919 को बैशाखी के त्योहार की खुशियों में जलियांवाला बाग में मेले का आयोजन किया गया था। वहां स्त्री पुरुष बच्चे हजारों की तादात में मौजूद थे। बाग में आने जाने का रास्ता एक ही था अचानक अंग्रेज अधिकारी माइकल डायर व जनरल डायर अपनी फौज के साथ जलियां वाला बाग के रास्ते में खड़े होकर गोलियां चलाने लगे जिससे वहां भगदड़ मच गई। जिसमें हजारों बेगुनाह मारे गए। बाग में एक कुंआ था। वह लाशों से पट गया और हजारों लोग शहीद हो गए। उन्हीं लाशों के नीचे एक पांच साल का बच्चा दबा था। उसने प्रतिज्ञा ली की इस नरसंहार का बदला वह जरूर लेगा। 21 साल बाद ऊधम सिंह ने इंग्लैंड जाकर जनरल डायर को मौत के घाट उतार दिया। उसके बाद ऊधम सिंह की यह गर्जना पूरे देश में फैल गई। 12 जून 1940 को इंग्लैंड की बोस्टन जेल में अंग्रेजों ने क्रांतिकारी ऊधम सिंह को फांसी दे दी। इस मौके पर डा. धरम सिंह, अनिरुद्ध सिंह, सुधा देवी, अजय सिंह, सरोज, बिट्टू, मनोज, बजरंग प्रसाद, अनिल कुमार, निष्ठा, प्रतिष्ठा आदि मौजूद रहीं।