मुंगराबादशाहपुर।
बाल व्यास शशिकांत महराज ने कहा कि भगवान हमारे वस्त्र को नहीं देखते। भगवान हमारे जाती को नहीं देखते, भगवान हमारे कुल को नहीं देखते भगवान तो केवल भक्त के हृदय के भाव को देखते हैं। वह बनगांव तरहठी में चल रहे तीन दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे।
राम केवट संवाद कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान केवट के दरवाजे पर आए क्योंकि केवट का प्रभु के प्रति प्रेम था और केवट के जीवन में सत्संग था। जहां सत्संग है, वहीं विवेक है और जहां विवेक है वहीं परमात्मा है। पूरे मानस में भगवान का चरण तीन लोगों ने धोया है। पहली बार जनक जी ने धोया था विवाह के समय। उस समय जनक जी के पास जल और सोने, चांदियों के पात्र भी थे। दूसरी बार चरण धोया केवट ने। वहा गंगा जल था और केवट की कठौता थी। तीसरी बार भगवान के चरण धोई मां संवरी ने। उनके पास न तो पात्र था और न जल, हाथ का ही पात्र बनाया और इतना रोई कि मां संवरी की अपने आंसुओं से ही भगवान के चरण धो दिए। जो परमात्मा दुनिया को भवसागर से पार करते हैं, उन परमात्मा को केवट गंगा पार कराता है। केवट की महानता तो यह है कि केवट का हृदय में कोई अभिमान नहीं है वो अभिमान रहित है। केवट को भगवान मिले। मां पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप कर रही है। जीवन में अगर हमें कुछ पाना है तो हमारे जीवन में तप होना चाहिए। क्योंकि बिना तप के इस संसार में कुछ नहीं मिलता। इस मौके पर ब्लाक प्रमुख बृजलाल यादव, अपर जिला जज लालजी पांडेय ने माल्यार्पण किया। इस मौके पर प्रियंका, ऋचा, वंदना, पूजा, शेषधर, शोभनाथ पांडेय, भोला शुक्ला, शेषधर, गिरजा शंकर मिश्र, लवकुश तिवारी, रोहित, राजेश, बाल कृष्ण, अवधेश, कमल कुमार मिश्र मौजूद रहे। आनंद तिवारी और प्रभात तिवारी ने आभार व्यक्त किया।