खुटहन। मथुरा से पधारे संत स्वामी दयानिधि गोस्वामी महराज ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर पाप और अत्याचार बढ़ा है, साधु , संत और रिषियों मुनियों की तपस्या में आसुरी शक्तियों ने ब्यवधान पैदा किया है। अत्याचार असहज होने पर प्रभु विभिन्न स्वरूपों में अवतरित होकर पापियों और दुराचारियों का नाश कर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना किया। सियराबासी गांव के दुर्गा पूजा स्थल पर चल रहे नौ दिवसीय संगीतमय मानस प्रवचन में संत ने कहा कि त्रेता युग में राक्षसों के राजा रावण का अत्याचार बढ़ने पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के अवतार लिया। भगवान का जन्म होते ही श्रद्धालुओं के जयकार से पूरा पांडाल गुन्जायमान हो गया। उन्होंने भगवान के बाल सौन्दर्य से लेकर उनके द्वारा मर्यादा धर्म निभाने तक का भाव पूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि नर रूप में भगवान परिवार, समाज और अपने राज्य के प्रति उत्तम आचरण प्रस्तुत कर मर्यादा पुरुषोत्तम बन गए। जिससे हम सभी को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। हम भी गृहस्थ आश्रम में रहकर सदाचरण और सभी मर्यादाओं का पालन कर भगवान के प्रिय हो सकते है। इस मौके पर अमरनाथ तिवारी, ओम प्रकाश तिवारी, राजकुमार, देवेन्द्र, शैलेस, रिन्कज, रामकृपाल, कुवर साहब आदि मौजूद रहे।