मौलाना यूसुफ कुरैशी ने कहा कि अल्लाह ने रमजान महीने में रोजा के जरिए रोजेदार को भूख प्यास का अहसास कराया। इससे वह भूख और प्यास की कीमत समझें और समाज के गरीब लोगों की मदद करें।
शाही मस्जिद में तरावीह की नमाज के दौरान मौलाना ने कहा कि माहे रमजान में हर मुसलमान को फितरा और जकात निकालना चाहिए। अपनी आमदनी का ढाई प्रतिशत भाग समाज के गरीब और कमजोर लोगों को मदद स्वरूप दान देना चाहिए। इससे वह भी रमजान के पाक महीने में अल्लाह की इबादत कर सकें और भरपेट भोजन और तन पर कपड़ा धारण कर सके। अल्लाह ने अपने बंदों को इस माह में गरीबों और जरूरतमंद पर खूब ख़र्च करने के लिए कहा है। इस माह में ख़र्च करने से अल्लाह अपने बंदों को बरकत प्रदान करता है। इसके अलावा, उन्होंने रमजान में तरावीह की नमाज को महत्वपूर्ण बताया। रात में तरावीह की नमाज पूरे पाक महीने में हर मुसलमान को पढ़ने की हिदायत दी।
खेतासराय। रमजान के पाक महीने में बच्चों के साथ साथ बच्चियां भी रोजे रखने में पीछे नहीं है। नगर के पोस्ट आफिस वार्ड निवासी मोहम्मद फरहान की 10 वर्षीय पुत्री शहजीन शेख ने इस वर्ष पहला रोजा रखा है। शहजीन ने बताया वो अपनी मां फरहीन और नानी से प्रेरित होकर खुदा की इबादत के लिए रोजा रखा है। शहजीन के परिजनों ने इस गर्मी के मौसम में रोजे रखने से मना किया लेकिन फिर शहजीन के जिद के आगे किसी न चली। मा फरहीन ने बताया कि फरहीन दिन के 15 घंटे का रोजा सब्र और सुकून के साथ रखा फिर अफ्तार का वक़्त होने पर सबके लिए दुआ मांगी।