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गायत्री महायज्ञ का आयोजन 1

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मछलीशहर। हिंदू धर्म में अधिक मास को बहुत ही पवित्र और पुण्य फल देने वाला माना गया है। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस महीने में पुरुषोत्तम भगवान की पूजा करने व श्रीमद्भागवत की कथाएं सुनने, मंत्र जाप, तप व तीर्थ यात्रा का करना पुण्यफलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवित जैसे शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। विद्वानों के अनुसार ज्योतिष में चंद्रमास 354 दिन व सौरमास 365 दिन का होता है। इस कारण हर साल 11 दिन का अंतर आता है। जो तीन साल में एक माह से कुछ ज्यादा होता है। चंद्र और सौर मास के अंतर को पूरा करने के लिए धर्म शास्त्रों में अधिक मास की व्यवस्था की है। अधिक मास को मलमास भी कहा जाता है। सूर्य का संक्रमण इनसे जुड़े होने के कारण अधिक मास को मल मास भी कहा जाता है। स्नान-दान और धर्मकथा श्रवण, पूजन करना है महत्वपूर्ण शास्त्रों में बताया गया है कि इस महीने में व्रत-उपवास, दान-पूजा, यज्ञ-हवन और ध्यान करने से मनुष्य के सारे पाप कर्मों का क्षय होकर उन्हें कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। अवधि में दिया गया एक रुपया का दान यजमान को सौ गुना फल देता है। इसलिए अधिक मास में स्नान दान के महत्व को ध्यान में रखकर दान-पुण्य देने का बहुत महत्व है। इस माह भागवत कथा, श्रीराम कथा श्रवण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करने से मोक्ष और अनंत पुण्यों का फल प्राप्त होता है।
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