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प्रधान डाकघर के अधीक्षक समेत पांच पर धोखाधड़ी का वाद दर्ज, जांच का आदेश

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जौनपुर। कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित प्रधान डाकघर में रुपए निकालने के मामले में मजदूर के प्रार्थना पत्र पर कोर्ट ने प्रधान डाकघर के अधीक्षक समेत पांच डाककर्मियों के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन का वाद दर्ज कर कोतवाल को जांच का आदेश दिया।
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मोहम्मद अनवर निवासी तमरसापुर थाना कोतवाली ने कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया कि वह मजदूर है। वह प्रधान डाकघर में एक आरडी चलाता था। उसने विभिन्न तिथियों पर 80900 रूपए डाकघर में जमा किया लेकिन डाक कर्मियों द्वारा कुल 41300 रुपए दिखाया गया। शेष रुपयों के बारे में पूछताछ करने पर कैशियर ने 25 नवंबर 2016 व 27 अप्रैल 2017 की जमा राशि के बीच की खाली जगह में अलग अलग तिथियां दर्ज करके उसके आगे शेष अलग अलग राशियां दर्जकर वादी को पासबुक वापस कर दिया। पासबुक देखकर कैशियर से ऐसा करने का कारण पूछा तो कैशियर ने कहा कि तुमने पैसा निकाला इसलिए पासबुक पर चढ़ा दिया। ज्यादा बोलोगे तो पुलिस बुला कर अंदर करा दूंगा। डाक अधीक्षक से शिकायत करने पर उन्होंने जांच कराकर रुपए वापस दिलाने का आश्वासन दिया। प्रधान डाकघर के जांच अधिकारी द्वारा वादी का बयान लेने और नमूना हस्ताक्षर बनवाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई, न ही भुगतान किया गया। काफी दिनों तक वादी को कार्रवाई का आश्वासन देकर दौड़ाते रहे। अंतत: वादी ने नवंबर 2017 में जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया तब पुलिस द्वारा पूछताछ की गई। इसके बाद डाक अधीक्षक द्वारा वादी को डाक से 23 दिसंबर 2017 को सूचित किया गया कि वादी के मामले में जांच जारी है और अब तक की जांच से पता चला है कि निकाले गए पैसे का भुगतान वादी को नहीं हुआ। वह भुगतान फर्जी तरीके से प्रधान डाकघर के डाककर्मियों की मिलीभगत से हुआ है। मामले में जांच जारी है। बाद में भी डाक कर्मियों पर कोई कार्यवाही नहीं होने पर अनवर ने पुन: पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रधान डाकघर के कर्मचारियों ने आपस में साजिश करके वादी के नाम से विड्रॉल फॉर्म भरकर उस पर वादी का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर उसके खाते से रूपये निकाल लिया। अपने कृत्य को सही ठहराने व सबूत मिटाने के लिए फर्जी ढंग से कूट रचना करके पासबुक में फर्जी निकासी का तिथि दर्ज कर रुपए हड़प लिया।
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