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त्रैतापों का संहारक है भागवत कथा

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खुटहन। भागवत कथा के श्रवण, मनन और आचरण से दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तापों से मुक्ति मिल जाती है। भागवत कल्पवृक्ष के समान मनोवांछित फल प्रदान करने वाला है। यह बात काशी के आचार्य अखिलेश चंद्र मिश्र ने डिहिया गांव में दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन शनिवार की रात प्रवचन के दौरान कही।
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उन्होंने कहा कि नर लीला करते हुए प्रभु रामचंद्र का चरित्र आदर्श का दर्शन है जबकि श्रीकृष्ण का चरित्र योगेश्वर का है। प्रभु राम ने जो आदर्श प्रस्तुत किए हैं उन पर हमें चलना चाहिए। भगवान कृष्ण ने जो उपदेश दिया हैं, उन्हें हमें मानना चाहिए। सारे धर्मों का सार यही है कि जो व्यवहार हमें न भाए उसे हम दूसरे के साथ कत्तई न करें। राम प्रताप सिंह, उदय प्रताप सिंह, अरविंद सिंह गोप, अनिल सिंह, अंतिम पांडेय आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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