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भक्ति भाव से ही ध्रुव को स्वर्ग में मिला स्थान

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खुटहन। कथा वाचक अजय महराज ने कहा कि परमात्मा सिर्फ भाव का भूखा है। जिसके भाव में भक्ति सन्निहित है। वह ईश्वर का सर्वाधिक प्रिय है। इसी भक्ति के बल पर ध्रुव को प्रभु ने स्वर्ग में स्थान प्रदान किया है। भटौली गांव में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन उन्होंने भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद सभी जन्मो में अर्जित पूण्य का फल ही यह मानव शरीर है। इसका एक मात्र उद्देश्य है। ईश्वर की प्राप्ति और इस तन का उद्धार। काम, क्रोध, माया, मोह और लोभ के चक्कर में पड़कर इसे मत भुलाओ। अन्यथा फिर लाखों वर्ष उन्हीं योनियो में भटकना पड़ेगा। जो बीत गया उसकी चिन्ता छोड़ो। वर्तमान को सुधारों। भविष्य स्वयं ही उज्ज्वल हो जाएगा। अपने गृहस्थ आश्रम की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कुछ समय उस परम पिता को समर्पित करो। फिर देखो स्वत: ही श्रद्धा, भक्ति का भाव स्फुटित होने लगेगा। यही मुक्ति की तरफ अग्रसर होने का संकेत होगा। इस मौके पर मनोज सिंह, ओमकार, बब्लू, संदीप, सुरेश सिंह आदि मौजूद रहे। आयोजक श्रीराम सिंह ने आगन्तुको के प्रति आभार जताया।
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