जौनपुर। परिवहन नियम कानून को दरकिनार कर शहर और ग्रामीणांचल में जर्जर और खटारा बसों का स्कूल संचालक संचालन कराकर अभिभावकों को लूट रहे हैं। जो बस मालिक अपने वाहन को स्कूलों से अनुबंध कराए हैं। वह टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट बच्चों को ढोने के नाम पर लेते हैं। नियम है कि बसें नो प्राफिट नो लॉस पर ही संचालित होंगी। जबकि लाखों की कमाई स्कूल संचालक बसों से बच्चों को ढोने के नाम पर कर रहे हैं। स्कूलों के इस काले सच को जानते हुए भी परिवहन विभाग के अधिकारी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। कारण कई माननीयों के भी स्कूल संचालित हो रहे हैं। कई हादसे होने के बावजूद भी प्रशासन इस पर कड़ाई नहीं कर पा रहा है। जिले में वैसे तो एक हजार से अधिक बसें बच्चों को ढो रही हैं। लेकिन परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 14 सीट से ऊपर की 294 बसें ही पंजीकृत हैं। 14 सीट से नीचे 167 बसों का पंजीकरण सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में हुआ है। बाकी बसें ऐसे ही संचालित हो रही है। जिसका न तो कोई परमिट है और न ही कोई फिटनेस है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के संरक्षण में महंगी फीस के साथ ही परिवहन शुल्क दोहरी मार अभिभावक झेल रहे हैं। सौरभ कुमार , एआरटीओ ने कहा कि बसों के खिलाफ अभियान चलाकर 416 बसें चेक की गई थी। जिन बसों में कमियां मिली है। उनके संचालकों को नोटिस दिया गया है। जवाब आने के बाद कार्रवाई होगी। बसों के संचालन संबंध में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन है। उसके मुताबिक नहीं होने पर 73 बसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। फिटनेस समाप्त होने पर 167 स्कूल बस संचालकों को नोटिस दी गई है।