जलालपुर। भागवत कथा भगवान कृष्ण का दूसरा रूप है। इसे सुनने से मनुष्य को पापों से मुक्ति व सर्व सुखों की प्राप्ति होती है। यह बातें जलालपुर के तालामझवारा गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत में वृंदावन से पधारे आचार्य शरद कृष्ण ने कही। उन्होंने कहा कि बिनु परतीती होई नहीं प्रीति अर्थात माहात्म्य ज्ञान के बिना प्रेम चिरंजीव नहीं होता, अस्थायी हो जाता है। धुंधकारी चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मसात कर लेें तो जीवन से सारी उलझने समाप्त हो जाएगी। राजा परीक्षित जन्म एवं शुकदेव गौकर्ण आगमन की कथा सुनाई। शास्त्री जी महाराज ने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य व देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है। आवश्यकता है निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होती है। भागवत श्रवण प्रेतयोनी से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमदभागवत कथा सुननी चाहिए। भागवत श्रवण मनुष्य केे सम्पूर्ण कलेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने अच्छे ओर बुरे कर्मों की परिणिति को विस्तार से समझाते हुए आत्मदेव के पुत्र धुंधकारी ओर गौमाता के पुत्र गोकरण के कर्मों के बारे में विस्तार से समझाया। इस मौके पर शिव प्रकाश पांडेय, आचार्य राम त्रिपाठी, धीरेंद्र दुबे, पप्पू मिश्रा, संदीप शुक्ल, रवि तिवारी, सियाराम, राजेश मिश्रा, सुब्बुल चौबे,रमेश सिंह, डॉ. अखिलेश सिंह, महाप्रसाद पांडेय, प्राणनाथ, आदित्य झल्लू, सत्यप्रकाश, अंबुज, नीरज आदि मौजूद रहे।