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कार्य बहिष्कार कर निजीकरण का किया विरोध

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जौनपुर। बिजली के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मंगलवार को कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। विद्युत कर्मचारियों ने कामकाज से दूर रहकर हाइडिल परिसर में पांचवें दिन भी धरना दिया। उन्होंने बिनी किसी शर्त के बिजली के निजीकरण प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की।
जिला संयोजक निखिलेश सिंह ने कहा कि बिजली का निजीकरण कर्मचारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। ऊर्जा विभाग एवं पावर कारपोरेशन के प्रबंधन द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को गुमराह किया है। प्रदेश सरकार अपने एक साल के पूरा होने की उपलब्धियों में बिजली क्षेत्र में सुधार को महत्वपूर्ण बताकर बता रही है। बिजली के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है ऐसे में निजीकरण की कोई जरूरत नहीं है। जब तक सरकार द्वारा निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाएगा। तब तक हम लोग धरना प्रदर्शन व कार्यबहिष्कार जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि सभी संगठनों का समर्थन मिला है। साथ ही सभी संगठनों के अध्यक्षों द्वारा संबोधित भी किया गया। इस अवसर पर इंजीनियर एके मिश्रा, रामअधार,एके गुप्ता, एसके सोनौरिया, विनोद कुमार गुप्ता,बीबी सिंह, अभिषेक कुमार श्रीवास्तव, बीबी मिश्रा, मनोज कुमार, आरके कुशवाहा आदि उपस्थित रहे।
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राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन मंगलवार केे कार्य बहिष्कार कर प्रदेश सरकार द्वारा पांच प्रदेशों व सात जनपदों की बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौपे जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। इस दौरान सभी अवर अभियंता व प्रोन्नत अधिशासी अभियंताओं ने उच्चाधिकारियों के कार्यालय के सामने कार्य बहिष्कार किया। साथ ही बिजली का निजीकरण करने के प्रस्ताव को बिना किसी शर्त वापस लेने की मांग की।
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