जौनपुर। हजरत अली की शान में महफिल का आयोजन मरहूम सैय्यद अली शब्बर के निवास स्थान मुस्तफा हाउस अजमेरी में किया गया। जिसमें शायरो ने मौला की शान में कसीदे पढ़ी। महफिल की शुरूआत मौलाना आसिफ अब्बास ने क़ुरान की तेलावत से किया। उन्होंने कहा कि मौला अली की पैदाइश माह रजब की तेरह तारीख को खाना-ए-काबा में हुई थी। मौला अली का रूतबा इतना बुलंद है कि रसूले खोदा मोहम्मद साहब ने कहा था कि जिस जिसका मैं मौला उस उसके अली मौला हैं। शोला जौनपुरी ने कहा कि %शोला मुझे भी नाज है अपनी हयात पर, मैं रेजा खारे साकिये कौसर अजल से हूं%। डा. पीसी विश्वकर्मा ने कहा कि %ये इब्तेदा का चांद यही इंतेहा का चांद, निकला न इसके पहले कभी इस अदा का चांद। तनवीर जौनपुरी ने %जै़गम अजल से हूं मै गजन्फर अजल से हूं, हैदर है मेरा नाम तो हैदर अजल से हूं%। अब्बास काजमी %एक पल न बेहयाई का मुझको गुमान हो, रब्बे करीम मुझको अताकर हया का चांद%, कैफी मेहम्मदाबादी, नैय्यर रूधौलवी, आमिर कजगांवी, जैद सईद, वहदत जौनपुरी, हेजाब इमामपुरी, नातिक गाजीपुरी, अब्बास, ताबिश आदि शायरों ने भी कसीदे पढ़े। सैय्यद मोहम्मद मुस्तफा ने आभार व्यक्त किया। इस मौके पर मुफ्ती अनवार हैदर एडवोकेट, पूर्व एमएलसी सिराज मेंहदी, कायम आब्दी, सै. इमदाद, हैदर हुसैन, नजमुल हसन नजमी, अनवारूल हसन, मुफ्ती इब्राहिम हैदर, एतेशाम, आफाक हुसैन जैदी, मुफ्ती वसी, इसरास हुसैन आदि मौजूद रहे।