जौनपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. रवि वानखेडकर ने कहा है कि नेशनल मेडिकल बिल कमीशन जनविरोधी, छात्र विरोधी और धनी लोगों के लिए है। उन्होंने कहा कि इसका सभी को विरोध करना चाहिए। क्योंकि इस बिल के लागू होने के बाद चिकित्सा शिक्षा महंगी हो जाएगी। ब्रिज कोर्स द्वारा कम जानकारी वाले चिकित्सक लोगों का इलाज करेंगे और एमबीबीएस पास किए हुए बच्चों को ऐसे इम्तिहान को देना पड़ेगा जिसमें फेल होने के कारण आधे से अधिक बच्चे प्रैक्टिस करने से महरूम रह जाएंगे।
शुक्रवार की रात्रि 12 बजे लाइन बाजार स्थित आईएमए भवन पर वह डाक्टरों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सक ब्रिज कोर्स करने के बाद आधी अधूरी जानकारी पाकर जनता की चिकित्सकीय सेवा के लिए आ जाएंगे जो जनता के लिए आघातकारी होगा। उन्होंने बताया कि इस समय प्राइवेट कालेजों में 15 प्रतिशत सीटें मैनेजमेंट कोटे से भरी जाती है। इस बिल के आने के बाद 60 प्रतिशत सीटें मैनेजमेंट कोटे के तहत भर्ती जाने लगेंगी। एमबीबीएस पास करने के बाद बच्चों को प्रैक्टिस में और नौकरी के लिए उतरने से पहले परीक्षा देनी पड़ेगी। पिछले वर्ष एक लाख 30 हजार अभ्यर्थियों में 65 हजार अभ्यर्थी पास हुए थे। डा. वानखेडकर ने बताया कि एनएमसी बिल के विरूद्घ आईएमए 25 फरवरी से यात्रा शुरू की गई थी जिसका समापन 25 मार्च को इंदिरा गांधी स्टेडियम नई दिल्ली में महापंचायत के रूप में होगा। जिसमें 25 हजार डाक्टर आगे की रणनीति तय करेंगे। इस मौके पर डा. मनमोहन श्रीवास्तव, जफराबाद विधायक डा. हरेंद्र सिंह, डा. एके मिश्र, डा. रजनीश श्रीवास्तव, आईएमए अध्यक्ष डा. एनके सिंह, डा. विनोद प्रसाद सिंह, डा. लाल बहादुर सिद्घार्थ, डा. विनोद कन्नौजिया, देव प्रकाश सिंह, डा. अजीत कपूर, डा. अशोक पटेल, डा. गुलाब चंद्र, डा. सुभाष सिंह, डा. राजेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।