जौनपुर। कर्नाटक के पीपुल्स एजुकेशन कालेज आफ इंजीनियरिंग मांड्या के प्रो. सुरेश प्रभु ने कहा कि पाठ्यक्रम में किसी संस्था का विजन और मिशन समाहित होना चाहिए। साथ ही समाज की आवश्यकता, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखना चाहिए। वह वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के उमानाथ सिंह इंजीनियरिंग संस्थान में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता पर चल हे दो दिवसीय कार्यशाला के समापन के अवसर पर बोल रहे थे।
प्रो. एचडी रविंद्र, प्रो. वी दिनेश प्रभु, प्रो. बीआर देवदत्त, प्रो. केरवि, प्रो. एनएल मुरली कृष्णा शिक्षकों से रूबरू हुए। विशेषज्ञों ने शिक्षकों को समूहों में बांट कर उन्हें अपने विषयों को बेहतर तरीके से पढ़ाने के के गुर सिखाए। विशेषज्ञों ने कहा कि छात्र विषयों का अच्छी तरह से ज्ञान कराने के लिए निरंतर अपडेट करना चाहिए। शिक्षकों का दायित्व है कि उद्योगों के मांग के अनुरूप उन्हें तैयार करें। श्वेता भटनागर व तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. बीबी तिवारी ने आभार ज्ञापन किया। संचालन डा. रजनीश भास्कर ने किया। प्रो. एके श्रीवास्तव, डा. संतोष कुमार, डा. राजकुमार, डा. अमरेंद्र सिंह, डा. प्रवीण कुमार सिंह, सत्यम उपाध्याय, ज्योति सिंह, डा. उदय राज, डा. जेपी लाल, ज्ञानेंद्र पाल आदि मौजूद थे।