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फूलों की खेती से सुधरेगी किसानों की आर्थिक स्थिति

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जलालपुर। सिरकोनी ब्लाक के सेहमलपुर गांव में शनिवार को फूलों की खेती कैसे करें विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों की फूलों की खेती करने के साथ उससे होने लाभ को बताया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि पुष्प कृषि विशेषज्ञ रवि पाल ने कहा कि देश के किसान आम तौर पर गेहूं, धान, मक्का जैसे अनाजों की खेती करते हैं। इसके अलावा कुछ किसान दलहन, तिलहन औऱ सब्जियों भी खेती करते हैं। लेकिन इन पारंपरिक फसलों से किसानों को ज्यादा मुनाफा नहीं होता है। फूलों की खेती एक ऐसा विकल्प है जो किसानों को सालों साल फायदा दे सकता है। अगर फूलों की खेती ठीक तरीके से की जाए और उसकी मार्केटिंग का उचित प्रबंध हो तो किसानों की जिंदगी में भी खुशियों के फूल खिल सकते हैं। रवि पाल खुद मैनपुरी में 25 बीघे खेत में फूलों की खेती करते हैं। उन्होंने एमबीए करने के बाद नौकरी करने के बजाय खेती को अपना व्यवसाय बनाया और सफलता पूर्वक फूलों की खेती करके एक मिसाल कायम की। आज उनके साथ करीब 500 किसान जुड़े हैं। रवि पाल ने किसानों को फूलों की खेती के बुनियादी तौर तरीकों के बारे में बताया। दूसरे सत्र में फूलों की खेती के लिए प्रायोगिक विधि को समझाया। फूलों को तैयार होने के बाद उसे अच्छे दामों पर कैसे बेचा जाए ताकि अधिकतम मुनाफा मिले। इस मौके पर टीम बदलाव के एसपी यादव, अरुण प्रकाश, हरि प्रकाश और विजय प्रकाश ने भी शिरकत किया। ग्रीन हाउस तापमान को प्राकृतिक रूप से 5-10 डिग्री तक कम कर देता है, लेकिन खुला होने की वजह से इसमें तामपमान पूरी तरह नियंत्रित नहीं होता। विशेषज्ञों ने कहा कि पाली हाउस तकनीक कारगर साबित होती है। क्योंकि इसमें तापमान को पूरी तरह नियंत्रित करके ठंडा रखा जाता है, जिससे फूलों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ता और पैदावार अच्छी होती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता खरपत्तू यादव ने की। संचालन मंगलदेव ने किया।
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