बजट में किसानों के लिए कृषि ऋण एवं कृषि उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर माडल विकसित करने की बात कही गई है। लेकिन किसानों का कहना है कि इससे उनका भला नहीं होने वाला है।
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राजनाथ यादव ने कहा कि साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद सरकार द्वारा बजट में खरीफ की फसल की कीमत लागत से डेढ़ गुना करने की बात कही गई है। जबकि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ही सरकार किसानों के फसलों की कीमत लागत से दो गुना करने का वादा किया था। जबकि सरकार को बिजली दरों को कम करने, किसानों को पेंशन देने,फसलों की सुरक्षा करने और फसल को बेचने के लिए तहसील स्तर व ब्लाक स्तर पर मंडी खोलने आदि का प्राविधान करना चाहिए था। लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं किया गया है। कचगांव के किसान उमानाथ यादव ने कहा कि छुट्टा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जबकि इन पशुओं द्वारा फसलों को काफी नुकसान किया जा रहा है। ऐसे पशुओं से फसलों की सुरक्षा करने और फसलों की हुई क्षति का मुआवजा आदि देने का प्राविधान करना चाहिए। बदलापुर के किसान मनोज सिंह का कहना है कि कृषि उत्पाद को कलस्टर माडल पर विकसित करने से गांवों के किसानों का कोई फायदा नहीं होने वाला है। मुफ्त में किसानों को भी बिजली दी जानी चाहिए थी।