जौनपुर। तीन वर्ष तक की उम्र के 25 हजार बच्चे अतिकुपोषित हैं। ऐसे बच्चों को तत्काल सहायता की जरूरत है इसके बावजूद डाटा तक बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने अति कुपोषित बच्चों कंप्यूटर में फीड नहीं किया है जबकि 90 हजार कुपोषित बच्चों का विवरण आनलाइन कर दिया गया है। डाटा जब आनलाइन होने पर ही बच्चों को शबरी संकल्प योजना का लाभ मिल पाएगा।
गर्भवती महिलाओं और तीन वर्ष तक के कुपोषित बच्चों की सेहत दुरुस्त रखने के लिए सरकार शबरी संकल्प योजना चला रही है। पंचायती राज, जिलापूर्ति, स्वास्थ्य, ग्राम्य विकास, शिक्षा एवं बाल पुष्टाहार विभाग के समन्वय से संचालित इस योजना के लिए जिले भर में अभियान चलाकर बच्चों का वजन कराया गया है। उनमें से वजन के आधार पर कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की सूची तैयारी की गई। इस दौरान 90 हजार कुपोषित बच्चे पाए गए और 25 हजार अति कुपोषित। इनका विवरण हर हाल में 31 जनवरी तक आनलाइन करना है। इसके लिए डाटा फीडिंग का काम चल रहा है। विभाग ने 90 हजार कुपोषित बच्चों का विवरण तो आनलाइन कर दिया लेकिन 25 हजार अति कुपोषित बच्चों का डाटा फीड नहीं किया गया। योजना के तहत अति कुपोषित श्रेणी के बच्चों के खाते में पोषण के लिए एकमुश्त रकम भेजी जानी है और उनके परिवार जीवन स्तर सुधारने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाना है। मगर डाटा नहीं फीड होने के कारण इसका लाभ अति कुपोषित बच्चों को नहीं मिल पा रहा है, जिसकी उन्हें तत्काल जरूरत है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुपोषण में कमी आ रही है। पांच साल तक के 52 हजार बच्चे पिछले साल अति कुपोषित की श्रेणी में थे जबकि अबकी बार इस आयु वर्ग में 42 हजार बच्चे ही अतिकुपोषित पाए गए हैं। इनमें तीन साल तक के बच्चों की संख्या 25 हजार है। कम उम्र के इन बच्चों को तत्काल पोषण मुहैया कराने की जरूरत है लेकिन जिला कार्यक्रम अधिकारी जीडी यादव का कहना है कि 30 जनवरी तक शबरी योजना के दायर में आने वाले 25 हजार अति कुपोषित बच्चों का डाटा फीड करना है। वेबसाइट नहीं चलने से इसमें दिक्कत आ रही है। फीड करने में देर से इन बच्चों के पोषण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्हें बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की मौैजूदा योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार दिया जा रहा है। उनके पोषण में कहीं से कोई कमी नहीं आने दी गई है। यह दीगर बात है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के चलते महीने भर से अधिक समय तक आंगनबाड़ी केंद्र खुले ही नहीं और न पोषाहार का वितरण ही हुआ।