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चरित्र ही मनुष्य का सबसे श्रेष्ठ आभूषण: डॉ. मदन मोहन

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डोभी। कथावाचक डॉ. मदन मोहन मिश्र ने कहा कि मनुष्य को चरित्रवान होना चाहिए। चरित्र मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है। जिस मनुष्य के पास चरित्र है उसे समाज में हमेशा सर्वोच्च स्थान मिलता है। वह मंगलवार को श्री चंद्रकेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में परमसंत ब्रम्हलीन श्रीश्री उड़िया बाबा के कृपा प्राप्त बाबा त्रिभुवन दास जी महाराज के सानिध्य में चल रहे पांच दिवसीय रामचरित मानस कथा में बोल रहे थे। आगे उन्होंने कहा कि निर्बल बलवान से डरता हैं, निर्धन धनवान से डरता हैं, मूर्ख विद्वान से डरता हैं किंतु चरित्रवान से सब डरते हैं। इसलिए चरित्र ही सर्वश्रेष्ठ हैं। सुधार रावण चाहता था तलवार के बल पर, परशुराम चाहते थे कुठार के बल पर परन्तु श्रीराम ने उसको कर दिया व्यवहार के बल पर। श्रीराम का धनुष सदैव सिर के नीचे रहता था और परशुराम का फरसा सिर के ऊपर। शस्त्र का प्रयोग जब विवेक शक्ति के नियंत्रण में होगा तो सीमा व संस्कृति की रक्षा होगी। और जब शक्ति व शस्त्र का प्रयोग विवेक से नहीं होगा तो आतंकवाद व उग्रबाद पैदा होगा। काशी से पधारी मानस कोकिला डॉ. सुधा पांडेय ने कहा कि समग्र गुण श्रीराम को पाने में ही सार्थक होते हैं। विंध्यधाम से पधारे पं. अमरनाथ त्रिपाठी ने काम, क्रोध, लोभ के प्रभाव का विस्तार से वर्णन किया। कथा मंच का संचालन फतेह बहादुर सिंह ने किया। इस अवसर पर कपिल सिंह, त्रिभुवन सिंह,कन्हैया यादव, डॉ. महातिम निषाद,अनिल सिंह, दिवाकर सिंह, अवधराज यादव, चंद्रिका यादव,विनोद कुमार सिंह, महेंद्र प्रजापति,शिवधनी गुप्ता सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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