जौनपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे आवास के निर्माण में मानक की भी अनदेखी की जा रही है। किसी ने पुराने आवास की मरम्मत कराकर नया आवास दिखाकर पैसे का भुगतान करा लिया तो किसी ने मानक से बड़ा आवास बना लिया है। हालांकि विभागीय अधिकारियों की ओर से ऐसे किसी भी लाभार्थी को कोई नोटिस नहीं दी गई है।
वर्ष 2016 से शुरू हुई प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तीन सालों में जिले के कुल 21 विकास खंडों में 19517 आवासों का निर्माण कराया गया है। इसमें कई लाभार्थी ऐसे हैं जिन्होंने मानक को दर किनार कर आवास का निर्माण करा लिया है। नियम है कि 25वर्गमीटर एरिया में आवास का निर्माण कराया जाए। इसमें एक रूम, एक बरामदा और एक किचन का निर्माण अनिवार्य रूप से कराना है। लेकिन आवास का लाभ पाने वालों में से कुछ ने किचन का निर्माण नहीं कराया है तो कुछ ने अपने पास से पैसे लगाकर मानक से अधिक एरिया में आवास बनवा लिया है। हालांकि अफसरों का मानना है कि पीएम आवास निर्माण के लिए 25 वर्ग मीटर एरिया मिनिमम एरिया है। लाभार्थी चाहे तो बैंक से ऋण लेकर आवास को थोड़ा बड़ा बनवा सकता है।लेकिन उसे पीएम आवास के लिए सरकार की ओर से सिर्फ 1.20 लाख रुपये ही दिया जाएगा। परियोजना निदेशक अरविंद कुमार सिंह का कहना है कि निर्धारित मानक से कम एरिया में पीएम आवास का निर्माण नहीं होना चाहिए। अगर कोई लाभार्थी किसी तरह से आवास की साइज बढ़ा ली है तो उसके लिए कोई अपत्ति भी नहीं हैं। लेकिन इतना जरूर है कि आवास में नक्से के हिसाब से एक रूम, बरामदा के साथ किचन का निर्माण जरूर होना चाहिए।
कोट:
पीेएम आवास के लिए लिए लाभार्थी को 1.20 लाख रुपये की धनराशि तीन अलग अलग किस्तों में दी जाती है। आवास के लिए स्टैंडर्ड मानक 25 वर्ग मीटर है। अभी तक मानक के विपरीत आवास बनाने के मामले में किसी को नोटिस नहीं दी गई है।
अरविंद कुमार सिंह
परियोडना निदेशक डीआरडीए