जौनपुर। जिले में तकरीबन 21 हजार से अधिक छुट्टा पशु किसानों से लेकर प्रशासन के लिए भी सिरदर्द बन गए हैं। छुट्टा पशुओं के चलते शहर में यातायात तो गांवों में खेती के लिए बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है। किसान अब जगह जगह छुट्टा पशुओं को गांव के प्राथमिक विद्यालय में बंद कर दे रहे हैं जिससे बच्चों का शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। पिछले एक पखवारे में जिले के 50 से अधिक गांवंो में किसान छुट्टा पशुओं को स्कूलों में बंद कर चुके हैं। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए इस ठंड में रतजगा कर रहे हैं। इस समस्या को लेकर लोगों में आक्रोश है।
करीब 50 लाख की आबादी वाले इस जिले में पांच लाख हेक्टेयर में खेती होती है। इन दिनों आलू, मटर, चना, सरसों की फसल खेत में है। झुंड में निकल रहे छुट्टा, सांड़, बछवा, गाय और घडऱोज आदि फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। फसल को बचाने के लिए किसान दिन रात रखवाली कर रहे हैं। खास तौर से गोवंश की खरीद और बिक्री ठप होने के चलते तमाम लोग मवेशियों को खुला छोड़ दे रहे हैं। पशु पालन विभाग के आकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2012 में पशु गणना में जिले में कुल पशुओं की संख्या 9.36 लाख 273 थी। अनुमान है कि अब पशुओं की संख्या 10 लाख से अधिक है। इसमें साढ़े चार लाख गोवंशी मवेशी हैं। वर्ष 2012 में छुट्टा मवेशियों की संख्या 11 हजार 438 थी। जो अब बढ़कर 21 हजार से अधिक होने का अनुमान हैं।
दूध न देने वाली गायों को छोड़ दे रहे लावारिश
जौनपुर। खास तौर से गौवंशी मवेशियों को खरीदने और बेचने का धंधा लगभग बंद हो चुका है। इस नाते बछड़े और दूध न देने वाली गायों को लोग लावारिश छोड़ दे रहे हैं। ऐसे लोग रात में मवेशियों को लेकर घर से निकलते हैं और कहीं दूर इलाके में छोड़ देते हैं। ऐसे लावारिश पशु जहां तहां झुंड बनाकर रहने लगते हैं और दिन रात फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। हालात यह है कि 3217 राजस्व गांवों वाले इस जिले में कोई भी ऐसा गांव नहीं है जहां छुट्टा पशुओं से लोग परेशान न हों। कहीं कहीं तो 40 से 60 तकी झुंड में छुट्टा पशु चलते हैं और ये लोगों पर हमला भी क र देते हैं।
स्कूलों में बंद कर दे रहे छुट्टा पशु
जौनपुर। छुट्टा पशुओं से परेशान गांव के लोग अब जगह जगह प्राथमिक विद्यालयों में छुट्टा पशुओं को बंद कर दे रहे हैं। 15 दिन के भीतर बक्शा, सिकरारा, सिरकोनी, जलालपुर, बदलापुर, केराकत, महराजगंज, मछलीशहर समेत अन्य इलाकों मे ंकरीब 50 से अधिक विद्यालयों में छुट्टा पशुओं को लोग बंद कर चुके हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राजेंद्र सिंह कहते हैं कि विद्यालय में छुट्टा पशु बंद करने की सूचना मिलने पर पुलिस और एसडीएम को खबर दी जाती है। इसलिए कि गांव के लोग इतने गुस्से में होते हैं कि उनके सामने शिक्षा विभाग के अधिकारी कुछ नहीं कर पाते।
जिले में हैं दो गोशालाएं
जौनपुर। जिले में भी तक महज दो गोशाला हैं। कान्हां आश्रय प्यारेपुर और गोपाल गोशाला मडिय़ाहूं। प्यारेपुर की गोशाला में करीब 35 मवेशियों को रखा गया है।
नगर विकास, पंचायती राज और ग्राम्य विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से प्रत्येक विकास खंड में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थापित किए जाने की तैयारी की गई है। शीघ्र ही छुट्टा पशुओं से लोगों को निजात मिल जाएगी।
गौरव वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी जौनपुर
पशुओं को खुला छोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी
जौनपुर। मंगलवार को छुट्टा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए अफसरों के साथ हुई बैठक में मुख्य विकास अधिकारी गौरव वर्मा ने किसानों को चेतावनी दी है कि अगर किसी ने अपने पशुओं को खुले में छोड़ा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में तय किया गया कि प्रत्येक ब्लाक में बेसहारा पशुओं के लिए एक-एक अस्थायी गोवशं आश्रय स्थल बनाया जाएगा। जिला पंचायत, ग्राम पंचायत तथा मनरेगा के सहयोग से इसका निर्माण होगा। नगर विकास पंचायती राज विभाग एवं ग्राम्य विकास विभाग इन पशुओं के लिए चारे का प्रबन्ध करेगा। नेडा, नगर विकास पानी की व्यवस्था करेगा। प्रकाश की व्यवस्था नेडा, नगर विकास, ग्राम्य विकास एवं पंचायती विभाग के द्वारा किया जायेगा। पशुओं का रख-रखाव गृह विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, राजस्व एवं नगर विकास विभाग एवं चिकित्सा आदि की व्यवस्था पशुपालन विभाग के द्वारा किया जायेगा। बैठक में अपर जिलाधिकारी भू-राजस्व रामआसरे सिंह, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डा. विरेन्द्र सिंह, सभी एसडीएम, नगर मजिस्ट्रेट, सुरेंद्र नाथ मिश्र, उपायुक्त मनरेगा कमलेश सोनी मौजूद थे।
दूसरे दिन भी स्कूल में बंद रहे छुट्टा पशु
सिंगरामऊ। स्थानीय थाना क्षेत्र के मल्लूपुर गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालयों में सोमवार से बंद 50 छुट्टा पशुओं को दूसरे दिन मंगलवार को भी नीं निकाला जा सका। स्कूल के बाहर बच्चों की पाठशाला चली।
सोमवार की देर शाम को तहसीलदार बदलापुर मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किए लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला। तहसील प्रशासन के निर्देश पर एक पिकअप में सात छुट्टा पशुओं को लादकर चालक गनौली गांव में छोडने लगा तो स्थानीय निवासियों ने पिकअप चालक की पिटाई कर दी। ग्रामीणों ने बछड़ों को स्कूल के अंदर ही पुआल व पानी पिलाया। दूसरे दिन मौके पर पहुंचे कानूनगो और लेखपाल ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि पशुओं को जल्द गोशाला पहुंचाया जाएगा।