जौनपुर। जिले में चलाई जा रहा पोषण मिशन योजना सिर्फ नाम का साबित हो रही है। कुपोषण पर नियंत्रण के लिए तमाम कवायद की जा रही है लेकिन इसका कोई खास असर नहीं देखा जा रहा है। हालत यह है कि कुपोषित बच्चों की संख्या घटने की जगह बढ़ती ही जा रही है। जून में जिले भर में चलाए गए वजन दिवस अभियान में कुल 1,80630 बच्चे कुपोषित पाए गए थे। अक्तूबर में जब फिर वजन किया गया तो 1254 नए बच्चे कुपोषित पाए गए। अब जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़कर 1,81884 हो गई है।
कुपोषित बच्चों को सामान्यतया स्वस्थ बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाएं, पुष्टाहार उपलब्ध कराने के साथ ही और मां को जागरूक किया जा रहा है। कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए जिले में कुल 33979 बैग पुष्टाहार आ रहा है। सूत्रों की मानें तो सरकार जल्द ही सबरी संकल्प योजना भी शुरू करने वाली है। इसके बाद भी कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। स्थिति यह है कि पहले चरण में चले वजन दिवस अभियान में जिले में शून्य से पांच वर्ष के एक लाख 80 हजार 360 बच्चे कुपोषित मिले थे। अक्तूबर में फिर वजन की जांच की गई तो 1254 नए बच्चे कुपोषित पाए गए। अब जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 181884 हो गई है। इनमें 26461 अति कुपोषित और एक लाख 55 हजार 153 कुपोषित बच्चे हैं।
जिले में कुपोषित पाए गए बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए मुकम्मल व्यवस्था की गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कुपोषित बच्चों का इलाज किया जाता है। अति कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में भी पोषण पुनर्वास केंद्र खोला गया है। मौजूदा समय में जिले में 1730 अति कुपोषित बच्चों का इलाज चल रहा है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी जीडी यादव ने बताया कि सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं सहित सीडीपीओ को कुपोषित बच्चों पर पूरा ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। अति कुपोषित बच्चों का उपचार कराया जाता है। साथ ही उनको पुष्टाहार आदि का वितरण किया जाता है। जिले में वजन दिवस के दौरान 1254 नए कुपोषित बच्चे पाए गए हैं।