जौनपुर। शिया धर्म गुरू मौलाना सैयद सफदर हुसैन जैदी ने कहा कि इंसानियत की खिदमत करके भी खुशियां हासिल की जा सकती हैं। इमामों ने इंसानियत की खिदमत को ही सबसे बड़ी खुशी बताई है। जौनपुर अजादारी काउंसिल के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद हसन ने कहा कि अगले साल से ईद-ए-जहरा के इस कार्यक्त्रस्म में शिक्षा के क्षेत्र एवं मानव कल्याण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति को पुरस्कृत किया जाएगा। वह ईद-ए-जहरा पर शिया समुदाय के महा संगठन जौनपुर अजादारी काउंसिल कार्यालय हुसैनिया नकी फाटक में आयोजित कार्यक्त्रस्म में बोल रहे थे।
कार्यक्रम की शुरुआत तेलावते कुरान-ए-मस्जिद से की गयी। जिसमे ईद-ए-जहरा के महत्व पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। इद-ए-जहरा के मौके पर शिया मुसलमानों के घरों में खुशियों का माहौल होता है। लोग अजादारी में दो महीन आठ दिन के गम के बाद खुशी की शुरुआत करते हैं। शकील अहमद ने कहा कि फात्मा जहरा के बताए हुए रास्ते पर चलने की आज बहुत जरूरत है। एएम डेजी ने कहा कि हमें ईद-ए-जहरा ऐसे मनाना चाहिए जैसे अहैलेबैत (अ.स.) चाहते हैं। हम सबके इमामे जमाना (अ.स.) की खुशनुदी ही हमरी सबसे बड़ी खुशी है। संचालन कर रहें असलम नकवी ने कहा कि ईद-ए-जहरा में शरीयत के उसूलों का खास ख्याल रखना चाहिए। जौनपुर अजादारी काउंसिल के उपाध्यक्ष इसरार हुसैन ने कहा कि कोइ भी त्योहार हो उसमें परम्परा और शालिनता दोनों झलकनी चाहिए। संयोजक लायन सै. मो. मुस्तफा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में सैयद मोहम्मद जमा, तहसीन अब्बास सोनी, मिर्जा बाबर, हाजी समीर अली, नासिर रजा गुड्डू, एमएम हीरा, कायम, नजमुल हसन हैदरी आदि ने विचार व्यक्त किया।