जौनपुर। दो महीने आठ दिन तक गम मनाने के बाद बुधवार को शिया समुदाय के लोगों ने खुशी का इजहार किया। इमाम हुसैन के कातिल के कत्ल होने की खुशी में ईद-ए-जहरा का त्योहार पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। शिया समुदाय के लोगों ने अपने घरों पर लजीज पकवान बनाए और एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद पेश की।
बाजार भुआ स्थित मीर बहादुर अली मरहूम दालान इमामबाड़े पर महफिल आयोजित हुई। इसमें उलमाए कराम ने तकरीर के जरिए ईद-ए-जहरा के बारे में बताया। मीर बहादुर अली मरहूम दालान इमामबाड़े में पुरानी परंपरा के मुताबिक महफिल आयोजित हुई। इसमें मौलाना निसार हुसैन ने तकरीर में कहा कि शिया समुदाय के लोग ईद-ए-जहरा इसलिए मनाते हैं कि आज ही के दिन इमाम हुसैन का कातिल मारा गया था। उसके मारे जाने के बाद इमाम हुसैन का कुनबा पहली बार कर्बला में हुए जुल्म के बाद मुस्कुराया। इसके अलावा इमाम जमाना की आज ही के दिन ताजपोशी की गई थी। उन्होंने कहा कि हमें अदब के दायरे में इस जश्न को मनाना चाहिए ताकि यह पैगाम जाए कि हम मजलूम इमाम हुसैन के बताए हुए रास्ते पर ही चल रहे हैं। मौलाना हसन जाफर और मौलाना शाने आलम ने भी तकरीर की। महफिल में शायरे अहलेबैत कमर जौनपुर ने कलाम पढ़ा। ऐहतेशाम जौनपुरी ने कहा कि . पढ़ा कि आज कातिले सरवर का कलम हुआ है सिर, आज आबिदे मुजतर खुल के मुस्कराया है। इसके अलावा असगर उर्फ शम्मी और लड्डन भाई ने भी नजराने अकीदत पेश की। इस दौरान इमामबारगाह के मुतवल्ली सैयद अलमदार हुसैन रिजवी, हाजी असगर हुसैन जैदी, मरकजी मोहर्रम कमेटी के सद्र सैयद शहंशाह हुसैन रिजवी, अकबर एडवोकेट, लाडले हसन लड्डू भाई, हसन जाफर, अली मोहम्मद, राजेश भाई, बाबू भाई आदि मौजूद रहे।