जौनपुर। नगर निकाय चुनाव में विकास के मुद्दे गुम हो गए हैं। शहर की सड़कें जर्जर हैं। लोगों के घरों में शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच पा रहा है। बिजली के तार और पोल भी जर्जर हो चुके है। सफाई की व्यवस्था चौपट है। कूड़ा निस्तारण का कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं है। आंकड़ों पर गौर करें तो जबकि शहर के विकास पर नगर पालिका परिषद तकरीबन पांच सालों में 500 करोड़ से अधिक रुपये व्यय कर चुका है। बावजूद इसके शहर के हालत जस के तस हैं।
नगर पालिका परिषद की आबादी तकरीबन तीन लाख से अधिक की है। पौने दो लाख से अधिक मतदाता हैं। 39 वार्डों में पूरे क्षेत्र को विभक्त किया गया है। शहर में जिधर देखिए उधर गड्ढे ही गड्ढे हैं। नालियां पटी हुई हैं। गंदगी का अंबार हर मोहल्ले में लगा रहता है। कूड़ा निस्तारण के लिए कई साल से कवायद चल रही है लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। हर रोज तकरीबन सौ टन कूड़ा निकलता है। बावजूद इसके निस्तारण का इंतजाम नहीं हो सका है। चुनाव में सभी प्रत्याशी दल और जाति पर वोट मांग रहे हैं। एक-दो प्रत्याशियों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी प्रत्याशी ने विकास को मुद्दा नहीं बनाया है। आंकड़ों पर गौर करें तो नगर पालिका परिषद ने राज्य वित्त से डेढ़ सौ करोड़ से अधिक रुपए विकास पर खर्च करने का दावा कर रही है। सौ करोड़ के करीब बिजली, सौ करोड़ सड़क एवं पेयजल आदि पर पचास करोड़ और अन्य कार्यों पर सौ करोड़ रूपए खर्च हो चुके हैं। इसमें 17 करोड़ आडिटोरियम, 4 करोड़ कान्हा पशु आश्रम, 5 करोड़ पोखरा, सुंदरीकरण, 4 करोड़ पीडब्ल्यूडी को सड़कों की मरम्मत के लिए बजट दिया गया जिसमें कोई खास प्रगति नहीं है।
टीडी कालेज के प्रबंधक अशोक सिंह का कहना है कि विकास में भ्रष्टाचार बाधक बन गया है। बजट बढ़ाकर पैसा निकालकर बंदरबांट की प्रवृत्ति बढ़ गई है। भ्रष्टाचार जब तक खत्म नहीं होगा तब तक विकास नहीं होगा। चुनाव में विकास ही मुद्दा होना चाहिए।
समाज सेविका डॉ. विमला सिंह का कहना है कि शहर का विकास हुआ ही नहीं। जर्जर सड़कें हैं। चुनाव के दौरान सिर्फ वादे करते हैं। जीतकर जाने के बाद सब कुछ भूल जाते हैं। जनता को सोच समझकर अपना प्रतिनिधि चुनना चाहिए।
संदीप पांडेय का कहना है कि शहर में विकास के नाम पर कुछ हुआ ही नहीं। न तो कहीं पार्किंग की व्यवस्था हुई और न ही सीवर लगा, न ही आडिटोरियम बना। आखिर विकास हुआ क्या?
सोशल वर्कर संजय उपाध्याय का कहना है कि चुनाव में जाति हावी हो जाती है। सबका लक्ष्य कुर्सी पाना है। यही उनका विकास है। चुनाव हो रहा है। विकास हुआ कि नहीं इसका रिजल्ट जनता अपने निर्णय से देगी।