जौनपुर। अभिलेखों में हेराफेरी कर नियुक्ति पाने वाले प्राथमिक विद्यालय के तीन और उर्दू अध्यापकों को बीएसए डा. राजेंद्र सिंह ने सोमवार को निलंबित कर दिया। इनकी नियुक्त 2016 में हुई थी। मामले की जांच संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को सौंपी गई है। तीन दिन पहले भी फर्जी डिग्री लगाने के आरोप में दो उर्दू शिक्षक निलंबित किए गए थे। निलंबन की यह दूसरी कार्रवाई है जिससे अन्य उर्दू अध्यापकों में हड़कंप मचा है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राजेंद्र सिंह ने बताया कि रामपुर विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय सरायडीह में तैनात सहायक उर्दू अध्यापक मो. हलीम और रामनगर विकास खंड के काजीपुर दरगाह प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक मो. फिरोज पर आरोप है कि वे सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त होने से पहले राज्य सड़क परिवहन निगम में संविदा कर्मचारी थे। परिवहन निगम में गबन के आरोप में दोनों की संविदा समाप्त की चुकी है। बावजूद इसके चरित्र प्रमाण पत्र लगाकर दोनों ने सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति पा लिया। इनके अलावा धर्मापुर विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय चोरसंड में तैनात सहायक उर्दू अध्यापक नासरीन अतहर पर आरोप है कि उन्होंने स्नातक का अंक प्रतिशत बढ़ा दिया था जिससे मेरिट अधिक होने से उनकी नियुक्ति हो गई। वह 1984 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक हैं।
इससे तीन दिन पहले बीएसए ने दो उर्दू अध्यापकों को फर्जी डिग्री लगाने की पुष्टि होने के बाद निलंबित किया था। वर्ष 2016 में जिले में 32 उर्दू अध्यापकों की नियुक्ति प्राथमिक विद्यालयों में हुई थी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राजेंद्र सिंह ने बताया कि संबधित अध्यापकों की शिकायत पर जांच के दौरान खामी पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई कर जांच बैठा दी गई है।
जिले में वर्ष 2016 में हुई उर्दू अध्यापकों की नियुक्ति में धांधली का आरोप लगाते हुए शासन से शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद जांच बैठा दी गई है। जांच कमेटी में अपर शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा, मंडलीय शिक्षा निदेशक वाराणसी, बीएसए जौनपुर और सहायक शिक्षा निदेशक सेवाएं भी शामिल हैं।