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मूर्तियों के विसर्जन का प्रशासन ने पूरा किया कोरम

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मूर्ति विसर्जन के लिए खोदा गया गड्ढा
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जौनपुर। नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए कोर्ट ने कुंड तैयार कर उसमें मूर्ति विसर्जन करने का आदेश दिया है। प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन के लिए कुंडों का निर्माण तो कराया है लेकिन अधिकतर कुंड लंबाई, चौड़ाई और गहराई में मानक के अनुरूप नहीं बनाए गए हैं। कुंडों तक जाने का रास्ता भी खराब है। इसको लेकर पूजा समितियों में नाराजगी है।
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हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि मूर्तियों का नदी की जगह कुंड का इंतजाम कर पूर्ण विसर्जन कराया जाए। इसके लिए नदी से कम से कम 200 मीटर की दूरी पर कुंड बनाए जाएं। कुंडों का माफ 120 फीट लंबा, 80 फीट चौथा और दस से 12 फीट गहराई होनी चाहिए। कुंडों में तिरपाल यानी सिंथेटिक लीनियर लगी होनी चाहिए ताकि पानी का प्रदूषण जमीन के अंदर न जाकर तिरपाल पर रुक जाए। साथ ही मूर्तियों को एक दूसरे के ऊपर गिरकर टूटने से रोका जा सके। मूर्ति पानी में डूब जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि मूर्तियों का विसर्जन होना चाहिए न कि निस्तारण। इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर पर मानक के अनुरूप कुंडों की व्यवस्था नहीं की गई है। शहर में गोमती नदी के किनारे जो कुंड बनाया गया है। उसमें तिरपाल नहीं लगाया गया है। शुक्रवार को कुंड में पानी भरने का कार्य तेजी से चल रहा था। स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने कहा है कि प्रशासन पूरे जिले में मूर्तियों के विसर्जन की जगह निस्तारण का इंतजाम किया है। इससे जल प्रदूषण के साथ ही धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही है। श्री दुर्गा पूजा महासमिति के अध्यक्ष मोतीलाल यादव का कहना है कि धार्मिक भावनाएं आहत हुईं तो महासमिति चुप नहीं बैठेगी। मडिय़ाहूं : नगर से 12 किलोमीटर दूर मडिय़ाहूं जौनपुर मार्ग पर सई नदी के किनारे 30 फीट लंबा 30 फीट चौड़ा और 20 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है। इसमें मूर्तियां विसर्जित होंगी। सिकरारा : प्रतिमाओं का विसर्जन इस साल शारदा सहायक नहर में किया जाएगा । अलग से तालाब नहीं खोदे गए हैं। समितियां सुविधानुसार स्थान चयनित करके विसर्जन करेंगी। बक्शा: मूर्ति विसर्जन के लिए नगर दास कुटी व छूंछा घाट के पास गड्ढा खोदवाया गया है। कुछ स्थानों पर तालाबों में विसर्जन होगा। जलालपुर में महिमापुर स्थित पुल के करीब सई नदी के किनारे मूर्ति 15 फीट गहरा, लगभग 20 फीट लंबाई में गड्ढा खुदवाया गया है। सिंगरामऊ में पीलीनदी के किनारे लालगंज पुल के पास दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन के लिए प्रशासन ने गड्ढा खोदवाया है। खेतासराय में आजाद रेलवे क्रासिंग के समीप स्थित नहर में मूर्तियां विसर्जित की जाएंगी । सुजानगंज क्षेत्र के सखवट गांव में बने कुंड में मूर्तियां विसर्जित होंगी। यह कुंड 70 फीट लंबा 50 फीट चौड़ा, दस फ़ीट गहरा है। इसमें पानी भरा गया है। बदलापुर क्षेत्र की 58 प्रतिमाएं शाहपुर में पीली नदी के किनारे बने कुंड में विसर्जित की जाएंगी। कुंड तक जाने वाले मार्ग पर गड्ढे बने हैं। एसडीएम डा. केएस पांडेय ने बताया कि कुंडड में पानी भरवा दिया गया है । मुंगरा बादशाहपुर कस्बे सहित आसपास की प्रतिमाओं का विसर्जन उकनी में बनाए गए कुंड में होगा। यहां समितियों को कच्चे मार्ग से मूर्तियां ले जानी होंगीं। डोभी क्षेत्र में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए गोमती नदी के किनारे चंदवक पुल के पास वरमलपुर के वगीचे में कुंड बनवाया गया है।

मूर्ति विसर्जन के लिए रूट डायवर्ट
मछलीशहर। क्षेत्र की मूर्तियों विसर्जन सईं नदी के तट पर बने कुंड में किया जाएगा। मछलीशहर बरईपार रोड पर यातायात सोमवार को वन वे रहेगा । एक तरफ से मूर्तियां जाएंगी दूसरी तरफ से आवागमन जारी रहेगा। प्रभारी निरीक्षक पन्नग भूषण ओझा ने बताया कि कंधी पुल से पहले ही गांव से होकर रास्ता नदी तक गया है। इसी मार्ग से होकर मूर्तियां विसर्जन के लिए जाएंगी। नदी के तट पर 60 फीट लंबा, 40 फीट चौड़ा और 12 फीट गहरा गड्ढा नगर पंचायत की ओर से खोदवाया गया है। बाकी ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित मूर्तियों को गांव के तालाब में शनिवार को विसर्जित करने का निर्देश है।
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