घनश्यामपुर । पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारत के सब से तेजस्वी, तपस्वी, एवं यशस्वी चिंतक रहे हैं । वह एकात्म मानववाद के प्रणेता थे । उक्त बातें वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने मंगलवार को सल्तनतबहादुर पीजी कालेज बदलापुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती समारोह समिति के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित करते हुए कहा।
उन्होनें कहा कि पंडित जी के चिंतन के मूल में लोक मंगल व राष्ट्र का कल्याण समाहित है । वह दलगत एवं सत्ता की राजनीति से ऊपर उठ कर एक ऐसे राजनीतिक दर्शन को विकसित करना चाहते थे, जो भारत की प्रकृति एवं परम्परा के अनुकूल हो और राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति करने में समर्थ हो। विशिष्ट अतिथि खेल कूद युवा कल्याण व विधि एवं राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी ने कहा कि पंडित दीनदयाल प्रत्येक समस्या का समाधान समंवय में तलाशते थे । उनका कहना था कि हमारी राष्ट्रीयता का आधार भारत माता है । राज्यमंत्री ने कहा कि दीनदयाल जी की राजनीतिक शुचिता एवं प्रामाणिक पावन विचार आज के राजनीतिक फलक पर ध्रुव नक्षत्र की भांति आलोकित है ।उनका कहना था कि अर्थ का अभाव ही नहीं बल्कि अर्थ का प्रभाव भी धर्म का नाश करता है । राज्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंम शताब्दी वर्ष में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी। समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. दीनानाथ सिंह व संचालन एसोसिएट प्रोफेसर डा. डीके पटेल ने किया । इस अवसर पर काशी क्षेत्र के संयोजक डा. उत्तम ओझा , शैक्षिक संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नागेंद्र रघुवंशी ,डा. मानस पांडेय ,डा. जगदीश दीक्षित , डा. मिथिलेश सिंह , एसडीएम डा. केसी पांडेय , प्रबंधक विनोद कुमार सिंह,प्राचार्य डा. वृजेंद्र सिंह,अमरबहादुर सिंह , चन्द्रमणि सिंह , मिथिलेश सिंह , डा. ओमप्रकाश दुबे ,डा. राम मोहन अस्थाना , डा.हरिश्चन्द सिंह ,डा. पवन कुमार सिंह , डा.रेखा मिश्रा आदि लोग मौजूद थे ।